भारतीय रुपये का दुकानदार कर रहे अपमान, प्रशासन मौन

सुदेश कुमार
लगभग पुरे प्रदेश के विभिन्न बाज़ारों व छोटे -2 कस्बों से लेकर गाँवों में बीते 15 दिनो से एक-दो के सिक्के पूरी तरह लेने से दुकानदार मना कर रहे हैं। जब ग्राहक जोर जबरदस्ती करत हैं तो कुछ दबंग दुकानदार अपनी मनमानी व कानून कॊ धता बता कर मार पीट पर उतारू हो आते है | ऐसे में स्थानीय  बाज़ारों में प्रतिदिन छुटपुट लड़ाई व कहासुनी से लेकर हाथापाई तक बात पहुँच जाती है। नियमो की बात करे तो नियमो के तहत सरकार के द्वारा प्रचलित किसी भी भारतीय मुद्रा को लेने या उसके चलन नहीं करने से यदि कोई इनकार करता है तो यह एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है,

प्रचलित मुद्रा में सिक्के भी आते है, नियामी के तहत ऐसी शिकायत आप सीधे सम्बंधित पुलिस स्टेशन अथवा 100 नंबर पर फ़ोन करके भी दे सकते है, और पुलिस कॊ सूचना मिलने के उपरांत पुलिस सम्बंधित दुकानदार अथवा नागरिक पर कठोर कार्यवाही करेगी मगर यहाँ स्थिति इसके विपरीत है और पुलिस प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं देता है. वास्तविकता तो यह भी है कि इसकी शिकायत तक आम जनता पुलिस से नहीं करती है और कौन पुलिस थाने के चक्कर में पड़े कहकर लोग इसको नज़रंदाज़ करने लगते है.

क्या है मुख्य कारण सिक्के न लेने का 
छोटे दूकानदार केवल सिक्के इस कारण से नहीं ले रहे है कि उनसे वह सिक्के बड़े दुकानदार अथवा होलसेलर नहीं ले रहे है, बड़े दुकानदार और होल सेलर का इस सम्बन्ध में यह कहना है कि हमारे पास सिक्को की तयादत बढती जा रही है और इसको लेने के लिये एजेंसी वाले मना कर रहे है, हमारी पूंजी धीरे धीरे करके सिक्को में बदलती जा रही है. वही एजेंसी मालिको से जब इस सबंध में बात किया गया तो उनका भी यही कहना था कि हमारी मार्किट कलेक्शन का एक बड़ा हिस्सा सिक्को के रूप में हमारे पास आता है, अभी तक सब कुछ सही चल रहा था और रोटेशन बना हुआ था, मगर नोट बंदी और फिर उसके बाद जीएसटी लागू होने के बाद इन सिक्को को बैंक लेने से मना कर रही है. अब हमको अपना कारोबार करना है तो पूंजी के करेंसी में रखना पड़ा है मगर यहाँ दिक्कत ये है कि हमारी पूंजी धीरे धीरे सिक्को में बदलती जा रही है और सिक्के बैंक नहीं ले रहा है.
जो भी हो मगर पुरे प्रदेश में आई इस स्थिति से निपटने के लिए शासन के साथ साथ स्थानीय प्रशासन को भी मेहनत करनी पड़ेगी.

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