इलाहाबाद बैंक मण्‍डी कोंच शाखा में ग्राहक परेशान-बैंक के कर्मचारी ग्राहकों से खेल रहे हैं पास फैल का खेल

बैंक में रूपये देने वाला कर्मचारी ग्राहकों के साथ करता है भेदभाव, जानपहचान वालों का होता है पहले काम
बैंको में दलाल डाले हैं पूरी तरह से डेरा, पूरे दिन कुर्सी पर बैठकर काटते हैं समय
बैंक मैनेजर बने रहते हैं मौनी बाबा, ग्राहकों की शिकायतों को सुनना तो दूर उनसे नजर मिलाकर बात भी नहीं करते हैं
आईपी कल्‍चर बैंक पर पूरी तरह से हावी

हरिओम बुधौलिया

सरकारी योजनाओं में भी खूब हो रहा खेल, अपात्रों व चहेतों को मिल जाता है सरकारी योजना का लाभ, सरकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार भी नहीं दिखता दूर-दूर तक, बैंक में शायद ही हो कहीं एक भी पोस्‍टर पम्‍पलैट सरकारी की जनहितकारी योजना का मिल जाये

विकलांग ग्राहक ने की बैंक के स्‍टाफ की शिकायत प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी व मण्‍डलीय कार्यालय में
जनपद जालौन के कोंच में स्थित इलाहाबाद बैंक मण्‍डी शाखा में लेन-देन की व्‍यवस्‍था सही न होने के कारण ग्राहक इस भीषण गर्मी में खूब परेशान होता दिखाई देता है। दरसल बैंक मैनेजर एवं कर्मचारियों के द्वारा बनाये गये नियम कायदों में लोग खूब उलझ रहे हैं और बैंक के मैनेजर व कर्मचारियों को कोसने में लगे हुये हैं।
वर्तमान समय में इलाहाबाद बैंक मण्‍डी शाखा में यदि किसी को 20 हजार रूपये से ज्‍यादा निकालना हो तो उसे बैंक के अन्‍दर ही गणेश परिक्रमा करनी पड़ती है जिससे ग्राहक बैंक के लोगों को खूब कोस रहे हैं। यदि बैंक में कोई ग्राहक 20 हजार रूपये से ज्‍यादा लेना चाहता है तो पहले तो वह कैश मिलने वाली लाइन में लगे फिर जब उसका नम्‍बर आता है तो कैश देने वाला कर्मचारी फार्म पर हस्‍ताक्षर कर यह कहकर वापिस करता है कि इसे पास करा लाओ फिर जब ग्राहक दूसरे काउन्‍टर पर विड्रोल पास कराने वाली लाईन में लग जाता है और पास कराने के बाद वह फिर वहॉ से फिर उसी रूपया मिलने वाली लाईन में पुन: लग जाता है और फिर वह उसी पैसा देने वाले कर्मचारी के पास पहुंचता है तब उसे दोबारा लाईन में लगने के बाद ही पैमेन्‍ट मिल पाता है जिससे उसका काफी समय भी बर्वाद हो जाता है। भले ही प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी डिजीटल इण्डिया की बात करते हों लेकिन यहॉ तो बैंक कर्मचारी व बैंक मैनेजर इस डिजीटल इण्डिया के युग में भी  ‘पास पास ‘ का खेल खेल रहे हैं। अगर ‘पास पास’ का खेल खेलना ही है तो पहले पैसा लेने वाले काउन्‍टर की लाईन में क्‍यों लगवाया जाता है पहले पास ही करा लिया जाये फार्म फिर पैमेन्‍ट दिया जाये क्‍या जिस तरह से बीस हजार रूपये से कम रूपये लेने वाले ग्राहकों का पैमेन्‍ट किया जा रहा है उसी तरह ज्‍यादा रूपया लेने वालों का भी पैमेन्‍ट नहीं किया जा सकता है, वह भी तो कम्‍प्‍यूटर रखे हुये हैं जब पैसा ग्राहक के एकाउन्‍ट में पर्याप्‍त रूपया है तो फिर क्‍यों ग्राहक को भागमदौड़ का खेल खिलाया जा रहा है यह सब समझ से परे है। बैंक में सिर्फ एक ही खिड़की संचालित होना परेशानी का सबब बना हुआ है। हॉ एक दो घण्‍टे बाद जरूर एक और खिड़की कभी कभार चालू कर दी जाती है लेकिन तब भी 20 हजार रूपये से ज्‍यादा लेने वाले व्‍यक्ति को तो अनिवार्य रूप से ‘पास पास’ का खेल खेलना पड़ता है। वहीं पैसा देने वाला बैंक का कर्मचारी जो अपना नाम दुर्गेश बताता है अपने चहेतों के काम जो बिना लाईन में लगे अगल बगल से झांक रहे होते हैं खूब करने में लगा है। जब बीच में लाईन लगाये लोग इसका विरोध करते हैं तो यह कर्मचारी कहता है कि मैं काउन्‍टर बन्‍द कर दूंगा और किसी को कुछ नहीं मिलेगा। यह महाशय ऐसे बात करते हैं जैसे जनता अपना पैसा नहीं ले रही हो मानो इनसे ऊधार ले रही हो और ‘बैंक में आने वाला हर हमारा ग्राहक भगवान होता है’ के स्‍लोगन की धज्जियॉ उड़ाने में लगा है। वहीं जब कोई व्‍यक्ति बैंक मैनेजर के पास जाता है तो यहॉ के बैंक मैनेजर पता नहीं किस सुध में रहते हैं पूरी तरह से मौनी बाबा बने रहते हैं ग्राहक से बात करना भी उचित नहीं समझते हैं। बैंक में विकलांग एवं वृद्धों के लिये कोई भी व्‍यवस्‍था नहीं है। क्‍या जूनियर, क्‍या सीनियर सभी की एक ही लाईन रहती है हॉ बैंक के कर्मचारियों की इतनी तो हम तारीफ करेगें कि महिलाओं के लिये जरूर उसी पुरूष वाली लाईन के अगल बगल से खड़े होकर पैसे लेन-देन की व्‍यवस्‍था की गयी है। इस बैंक के ग्राहकों को अपनी पासबुक प्रिन्‍ट कराने के लिये महीनों चक्‍कर काटने के बाद बड़ी मुश्किल से पासबुक प्रिन्‍ट हो पाती है। भले ही हमारे प्रधानमंत्री जी बीआईपी और बीबीआईपी क्‍लचर को खत्‍म करने में लगे हुये हों लेकिन बैंक में पूरी तरह से बीआईपी क्‍लचर हावी है और ऐसे लोगों के लिये बैंक मैनेजर के पास कुर्सी खाली पड़ती रहती है और वहीं पर बैठकर उनका काम आसानी से हो जाता है। इस बैंक में दलाली का धन्‍धा खूब फल फूल रहा है। यहॉ पर तैनात दलाल खूब दिन भर कुर्सी तोड़ते रहते हैं और ग्राहकों के साथ बाहर आकर कमीशन का खेल खेलते रहते हैं और शाम के समय शुरू होते ही दलाल फिर बैंक के लोगों के साथ मिलकर अपना खेल खेलते हैं। भले ही देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी मुद्रा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड योजना, भैंस पालन योजना, छात्रों को पढ़ने के लिये ऋण योजना और कई अन्‍य ऋण योजना लोगों के हितों के लिये चला रहे हों लेकिन शायद ही हो बैंक के अन्‍दर या बाहर एक भी योजना का बैनर पोस्‍टर लगा नहीं दिखाई देता है। मुद्रा योजना और अन्‍य कल्‍याणकारी ऋण योजनाओं का भी अता पता नहीं है। दलाल अपने चहेतों एवं अपात्रों को ऋण सुविधा का लाभ प्रदान करवाने में लगे हैं और जनता से खूब कमीशन लेने में लगे हैं। बैंक में किसी भी दिन सरकार की कल्‍याणकारी योजनाओं की जानकारी बैनर पोस्‍टर लगाकर बैंक के अधिकारी व कर्मचारी ग्राहकों को नहीं देते हैं और जिससे सरकार की कल्‍याणकारी योजनायें बैंक कर्मचारियों के चहेतों अपात्र लोगों के हांथ में लग जाती हैं। फिलहाल बैंक में इन दिनों लूट सके सो लूट अन्‍तकाल पछतायेगा जब छूट, का खेल खेला जा रहा है। बैंक के एक विकलांग ग्राहक ने बैंक के तुगलकी नियम की शिकायत प्रधानमंत्री भारत सरकार एवं मण्‍डलीय कार्यालय में पत्र भेजकर कर दी है और यह भी कहा है कि हम विकलांग लोगों के लिये इस बैंक में कोई हमदर्दी नहीं है और अनावश्‍यक रूप से परेशान किया जाता है। वहीं इस ओर भाजपा के ईमानदार सांसद भानुप्रताप वर्मा एवं माधौगढ़ के विधायक मूलचन्‍द्र निरंजन को इस ओर ध्‍यान देना होगा और बैंक में फैली अव्‍यवस्‍थाओं को दूर कराना होगा व सरकार की जनकल्‍याणकारी योजनाओं का लाभ पात्रों को दिलाने के लिये बैंक के अधिकारी व कर्मचारियों के पेंच कसने होगें अन्‍यथा यह कर्मचारी भाजपा सरकार की छवि को धूमिल करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगें।

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