बोले तेजप्रताप – लंद फंद आरोपों की परवाह नहीं

(जावेद अंसारी)

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी के बाद सोशल मीडिया पर उनका एक जुमला ‘जब तक रहेगा समोसा में आलू, तबतक रहेगा बिहार में लालू’ समोसे में आलू, दियारा में बालू और बिहार में लालू । यह जुमला काफी पुराना, लोकप्रिय और हकीक़त के करीब है क्योंकि जो लोग बिन लालू बिहार की सियासत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वो मुगालते में हैं। राजद प्रमुख लालू यादव भले ही इन दिनों कानूनी तिकड़म में फंसे हों या सीबीआई (पिंजरे के तोते) और इनकम टैक्स विभाग के निशाने पर हों, मगर उम्र के 70वें पड़ाव में कदम रख चुके लालू को धर्मनिरपेक्षता के इरादों से डिगाना और गरीबों के मसीहा रूप में बनी उनकी छवि को बिगाड़ना 2019 तक तो मुश्किल लगता है। 27 अगस्त को पटना के गांधी मैदान में आयोजित होने वाली महारैली से बिहार का विपक्ष ही नहीं केंद्र सरकार भी परेशान है। तभी तो उन्हें घेरने की लगातार कोशिश हो रही है।

इससे पहले शोशल मिडिया पर लालू यादव का हिट ट्वीट ने विरोधियों के बीच हड़कम मचा दिया था, उन्होंने  ट्वीट कर कहा था कि अचक डोले-कचक डोले-खैरा-पीपल कभी ना डोले (मतलब मुझे कोई भी डिगा नहीं सकता) अंगद कि तरह पैर गाड़ के खड़ा हूँ, बीजेपी को चैन से नहीं रहने दूँगा, इसके बाद लालू के दुसरे हिट ट्वीट किया था, छापा-छापा-छापा-छापा-छापा- किसका छापा-किसको छापा-छापा तो हम मारेंगे 2019 में, मैं दूसरों का हौसला दिखाता हूं, मेरा कौन डिगाएगा| लालू ने कहा BJP की जवानी अब खत्म हो गई है, मोदी सरकार रूपी लंका को भस्म कर दूंगा, समझ लो, मैं डरने वालों मे से नहीं हूं, मोदी देश का बंटावारा चाहते हैं, अभी हम जिंदा है ऐसा होने नहीं दूंगा, बिहार का हिट रिकॉर्ड सोशल मिडिया के जरिए पूरी दुनिया भर पढ़ा गया, विरोधियों के हिट अभी तक हजम नहीं हुआ हैं (जब तक रहेगा समोसे में आलू तबतक रहेगा बिहार में लालू )
वही दुसरी ओर तेज प्रताप कहते हैं कि आने वाले कुछ महीनों में हमारा संघ बिहार-झारखंड के गांव-गांव में सक्रिय दिखेगा और हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई को बांटने की कोशिशों को नाकामयाब करेगा।तेज प्रताप ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि तमाम कमेटियां भंग कर युवाओं को जोड़ना ही हमारा लक्ष्य है। लगे हाथ यह भी कहते हैं कि लंद-फंद आरोपों की हमें कोई परवाह नहीं है। कानूनी लड़ाई कानूनी तरीके से लड़ी जाएगी लेकिन हम अफवाह फैलाकर समाज के टुकड़े करने वालों के इरादों को चूर-चूर कर देंगे। तेजप्रताप कहते हैं कि मीडिया में कौन क्या कह रहा है, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़नेवाला। दिल्ली में बैठकर बिहार में लालू प्रसाद की अहमियत का अंदाजा लगाना मुश्किल है। उन्होंने कहा, हमारा वजूद, हमारी ताकत हमारा वोटर है, जिनकी आवाज दबाना आसान नहीं है।
दरअसल, 2005 के चुनाव में अर्श से फर्श पर आए लालू एक दशक बाद 2015 में जनता जनार्दन की बदौलत ही सत्ता में लौटे हैं। नीतीश कुमार का साथ इनके लिए संजीवनी भी रही है। महागठबंधन ने ही नरेंद्र मोदी के विजय रथ को बिहार में रोका था। लालू यादव फिर से भाजपा के मिशन 2019 को फेल करने की कोशिशों में जुटे हैं। शायद यही वजह है कि भाजपा लालू यादव को बख्शने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाह रही है। तेजप्रताप कहते हैं कि 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव में भी गोमांस का मुद्दा जबर्दस्त तरीके से उछालकर माहौल बिगाड़ने की कुचेष्टा हुई थी, जिसे महागठबंधन ने नाकामयाब कर दिया था और आज भी बिहार में माहौल महागठबंधन के पक्ष में ही है।
राष्ट्रपति चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष को एक मंच पर लाने की पहल लालू यादव कर रहे हैं। यह कोशिश वक्त की नजाकत को भांपकर की जा रही है क्योंकि अगर विपक्ष एक नहीं हुआ तो सियासी समीकरण का जायका बिगड़ सकता है। इसलिए इस काम में पूरा लालू परिवार लगा हुआ है। चाहे पत्नी राबड़ी देवी हों या बेटी मीसा भारती या बेटा तेजप्रताप और तेजस्वी यादव। सभी सक्रिय राजनीति के अखाड़े में कूदकर कुलांचे भर रहे हैं। यह 2015 के सियासी समीकरण के बाद ही संभव हो पाया है।भाजपा के लोग तरह-तरह के आरोप भी इस परिवार पर जायदाद हासिल करने को लेकर लगा रहे हैं। अलबत्ता 27 अगस्त को बुलाई पटना के गांधी मैदान में महारैली एक दफा फिर लालू प्रसाद की ताकत को दिखा देगी।

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