‘कैश फार क्वेरी’ के आरोप एथिक्स कमेटी ने सौपी 104 पन्नो की रिपोर्ट, महुआ मोइत्रा हुई संसद से निष्काषित, बोली, अगले 30 सालो तक संसद के अन्दर और बाहर लडती रहूंगी

तारिक़ खान

डेस्क: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर लगाए गए ‘कैश फॉर क्वेरी’ के आरोपों को लेकर लोकसभा की एथिक्स कमेटी की सिफ़ारिश पर उन्हें सदन से निष्काषित कर दिया गया। बताया गया था कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मोइत्रा को सदन में बोलने की इजाजत नहीं दी। एथिक्स कमेटी की 104 पन्नों की रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद संसद सदस्यों को इसे पढ़ने के लिए केवल दो घंटे का समय देने के बाद दोपहर साढ़े तीन बजे चर्चा होनी थी।

हालांकि, बहस शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर मोइत्रा के निष्कासन की घोषणा कर दी गई। मोइत्रा की पार्टी टीएमसी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने संसद के बाहर रिपोर्ट पर गंभीर विरोध जताया है। फैसले के बाद संसद भवन के बाहर मोइत्रा ने कहा कि अगर मोदी सरकार को लगता है कि उन्हें चुप कराकर अडानी मुद्दे को भुला दिया जाएगा है, तो वो ग़लत है और वे अगले 30 सालों तक संसद के अंदर-बाहर लड़ने के लिए तैयार हैं।

इस निर्णय के बाद संसद से बाहर निकलते हुए मोइत्रा ने कहा कि यह कंगारू कोर्ट है। उन्होंने कहा, ‘चूंकि मुझे संसद के अंदर बोलने की अनुमति नहीं थी, इसलिए मैं इसके बाहर बोल रही हूं। मैं अपने ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगियों का शुक्रिया अदा करती हूं, जैसा कि एथिक्स समिति की सुनवाई से पता चलता है, हम सभी सांसद लोगों के सवालों को संसद तक पहुंचाने का जरिया हैं। अगर मोदी सरकार को लगता है कि मुझे चुप कराकर अडानी मुद्दे को भुला दिया जा सकता है, तो वो गलत है।’

विवादास्पद रिपोर्ट को पहले 4 दिसंबर को निचले सदन में पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन उस दिन इसे पेश नहीं किया गया। इससे पहले रिपोर्ट के कारण सदन में हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तो अध्यक्ष बिरला ने बमुश्किल दो घंटे पहले पेश की गई रिपोर्ट पर 30 मिनट की चर्चा की अनुमति दी।

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