‘अली डे’ पर विशेष: ‘फटी चटाई पर हुकूमत’ सँभालने वाले अली, एक महान फिलासफर, महान मोटिवेटर, महान समाजशास्त्री और समाजसेवक, पढ़े हजरत अली के कुछ कालीमात

शाहीन बनारसी

17 मार्च 600 से तक़रीबन 1400 वर्ष पहले मुस्लिम तीर्थ स्थल काबा में जन्मे अली इब्ने अबी तालिब जिन्हें में हज़रत अली भी कहते हैं। हजरत अली को पहले इस्लामिक साइंटिस्ट  होने का भी खिताब है। यही नही कायनात के सबसे श्रेष्ठ फिलासफर भी हजरत अली को माना जाता है। आज भी उनके इस दुनिया को अता किये गए लफ्ज़ लोगो के दिलो में सुकून और मोटिवेशन भर देते है।

बेशक मौला अली कुवत का दूसरा नाम है. और कई जंगे उन्होंने अकेले जीती है. जिसमे खैबर की जंग जहाँ हज़ारो मुखालिफ सैनिको को हजरत अली ने अकेले ही नेस्तनाबूत कर दिया के बावजूद भी हजरत अली लोगों को शांति और अमन का पैगाम दिया करते थे. वह आवाम तक अपने शब्दों से बताया करते थे कि इस्लाम कत्ल और भेदभाव करने के पक्ष में नहीं, अपने शत्रु से प्रेम करो इससे वो एक दिन दोस्त बन जाएगा. उनका कहना है कि ज़ुल्म करने वाला ही नहीं बल्कि ज़ालिम का मददगार और उसके ज़ुल्म कर खुश होने वाला भी ज़ालिम है. आवाम मौला अली को खत लिख कर अपने ऊपर हो रहे ज़ुल्म-ओ-सितम को बताती थी. जिसके बाद उस ज़ालिम हाकिम को मौला अली नसीहते करते, मगर अगर उसके बाद भी वह ज़ुल्म बंद नही करता तो जंग का एलान होता था.

13 रजब 30 आमुल फ़ील को ख़ाना-ए-काबा में पैदा हुए अली इब्ने अबी तालिब की परवरिश रसूल अल्लाह स0अ0 के घर पर हुई। फ़ात्मा बिन्ते असद और कुल्ले ईमान हज़रत अबू तालिब के बेटे अली की तरबियत भी पैग़म्बरे अकरम स0अ0 की निगरानी में हुई। हज़रत अली पहले मर्द थे जिन्होंने ईमान का इक़रार किया, उस वक़्त आप की उम्र 10 या 11 बरस थी। रसूले मक़बूल स0अ0 के बाद इमाम अली ने 25 साल गोशा नशीनी में बसर किया और 35 हिजरी में मुसलमानों ने ख़िलाफ़त-ए-इस्लामिया का मंसब आपके सामने पेश किया। मगर ज़माना आपकी ख़ालिस मज़हबी ख़िलाफ़त को बर्दाश्त न कर सका। आपके ख़िलाफ़ वो जमात खड़ी हो गई जो मज़हब की आड़ में अपनी हुकूमत क़ायम करना चाहती थी।

दीन पर आंच आए और अली ख़ामोश रहे ये मुम्किन न था। चारो तरफ़ साज़िशों से घिरे अली ने अपनी अहदे ख़िलाफ़त में जमल, सिफ़्फ़ीन और नहरवान जैसी जंगों का सामना किया। ज़माने ने मौक़ा ही नहीं दिया कि वो अपने कमालात के जौहर दिखाते। आपने बारहा मजमें से ख़िताब करते हुए सलूनी-सलूनी का दावा किया यान आप कहते रहे कि जो पूछना चाहो मुझसे पूछो, मैं ज़मीन से ज़्यादा आसमान की बातें जानता हूं। लेकिन अलमिया देखिए कि किसी अहम सवाल पूछने के बजाए आपसे पूछा गया कि ये बताईए कि मेरे सर पर बाल कितने हैं। किसी ने फ़लसफ़े और मंतिख़ के सवाल ही नहीं पूछे।

अपने मुख़्तसर से ख़िलाफ़त के दिनों में आपने एक मिसाली निज़ाम क़ायम किया। समाजी बराबरी, रोज़ी रोटी का इंतेज़ाम, मेहनत, आम शहरी की इज़्ज़त, औरतों की आबरु का तहफ़्फ़ुज़, रोज़गार की तालीम, हलाल कमाई, झगड़े फ़ासद से दूर रहने की तलक़ीन की। मनसबे ख़िलाफ़त पर होते हुए बैतुल माल की रक़म को मुस्तहक़ीन तक रोज़ाना तक़सीम कर दिया करते थे और ख़ुद मज़दूरी करते, पैवंद लगे कपड़े पहनते, ग़रीबों के साथ ज़मीन पर बैठ कर खाना खाते, इंतेहा देखिए कि जब रात के वक़्त बैतुल माल का हिसाब किताब करते और कोई मुलाक़ात के लिए आता तो आप बैतुल माल के तेल से जल रहे चिराग़ को बुझा दिया करते। काबे में पैदा हुए अली इब्ने अबी तालिब की शहादत 19 रमज़ान 40 हिजरी इराक़ के कूफ़ा शहर की मस्जिद में उस वक्त हुई जब वह सजदे में थे।

अली इब्ने अबी तालिब को रसूल अकरम स0अ0 से इतना इश्क़ था कि एक लम्हे के लिए भी किसी महाज़ पर अपने आक़ा को अली तन्हा नहीं छोड़ते थे। जंगे बद्र से लेकर फ़त्हे मक्का तक साय की तरह साथ रहे। मुहम्मदे मुस्तफ़ा स0अ0 के दहने मुबारक से निकले हुए एक एक हर्फ़ को अली लौहे महफ़ूज़ का मुक़द्दर समझते थे। पैग़म्बरे अकरम स0अ0 के किसी हुक्म पर आपने कभी इंकार नहीं किया। यहां तक कि ये भी देखा गया कि रसूल अल्लाह स0अ0 की जूतियों में पैवंद लगाना इमाम अली अपने लिए बाइसे फ़ख़्र समझते थे। इमाम अली कि इन तमाम ख़ूबियों की बिना पर रसूले मक़बूल स0अ0 आपकी बहुत इज़्ज़त करते थे और हर महफ़िल में आप की फ़ज़ीलतें बयान कर दिया करते थे।

आप ताउम्र खिदमत-ए-खल्क करते रहे। एक वाकया यहाँ बयां करता हु जो खिदमत-ए-खल्क की एक मिसाल आज भी जामने के लिए है। एक फ़कीर का गुज़र एक रस्ते से हो रहा था और वह भूखे को खाना खिलाने की सदा लगा रहे थे। रस्ते में एक जगह फ़कीर की नज़र पड़ती है एक शख्स पर जो पानी में रोटी डूबा कर खा रहे थे, रोटी खा रहे शख्स ने उस फ़कीर को रोका और कहा वह सामने हसन और हुसैन का घर है, आप वहा सदा लगाये, आपको भरपेट खाना मिल जायेगा। गोया फ़कीर उस दर पर जाकर सदा लगाते है और हसन-हुसैन उस फ़कीर को पेट भर अच्छा खाना खिलाते है। खाना खाने के बाद फ़कीर ने एक और फ़रियाद किया और कहा कि सामने एक शख्स जिन्होंने मुझे इस घर का पता बताया वह पानी से सुखी रोटी खा रहे है, उनको भी खाने के लिए बुला लू क्या ? जिस पर हज़रत इमाम हुसैन इरशाद फरमाते है कि वह हजरत अली है और उनका ही यह सब कुछ इन्तेज़ामात है। अब आप सोचे कि सखावत का वह मर्तबा कि खुद सुखी रोटी पानी से खा रहे थे और सवाली को भरपेट भोजन का इंतज़ाम करते थे।

आपने ताउम्र रसूल अल्लाह स0अ0 का साथ दिया। बाद-ए-रसूल स0अ0 आंहज़रत की तजहीज़ो तकफ़ीन और गुस्लो कफ़न के तमाम काम हज़रत अली ने अपने हाथों से अंजाम दिया। आप ही क़ब्र में भी आप ही लेकर उतरे। पैग़म्बरे आज़म के बाद आपने ख़ामोशी अख़्तियार कर ली और इस्लाम की ख़िदमात में मसरुफ़ हो गए। इस दौरान आपने बहुत से ऐसे शागिर्द तैयार किए जो मुसलमानों की आइंदा अमली ज़िदंगी में मेमार का काम अंजाम दे सकें। गोशानशीन रहकर वसी-ए-रसूल, फ़ातहे ख़ैबर और ख़लीफ़तुल मुसलेमीन हज़रत अली इब्ने अबी तालिब ने ये पैग़ाम दिया कि अगर ज़माना मुख़ालिफ़ हो, एक़्तेदार सख़्ती करे, दुनिया मुंह फेर ले तो इंसान ख़ामोश रहकर कसम पुरसी में भी अपने फ़राएज़ को अदा कर सकता है। ज़ाती फ़ायदे के लिए दीनी और मिल्ली मफ़ादात को नुक़सान नहीं पहुंचना चाहिए। हुजुर-ए-पाक, सरवर-ए-कायनात स0व0 ने अपने आख़िरी ख़ुत्बे में सवा लाख हाजियों के बीच हज से लौटते हुए ग़दीरे ख़ुम के मैदान में अपना जानशीन, वली और वसी क़रार दिया। आज इस्लाम की उसी अज़ीम नेक लोगों की सोहबत से हमेशा भलाई ही मिलती हैं, क्योकि हवा जब फूलो से गुज़रती हैं, तो वो भी खुशबूदार हो जाती हैं।

लेखिका शाहीन बनारसी एक युवा पत्रकार है

आइये आपको हज़रत अली के वह कालीमात, जिनको पढ़ कर आज भी कायनात मोटिवेट होती है और ज़िन्दगी बसर करने के रास्तो को अपनाती है में से कुछ कालीमात बताते है:

  1. अगर कोई शख्स अपनी भूख मिटाने के लिए रोटी चोरी करे, तो चोर के हाथ काटने के बजाए बादशाह के हाँथ काटे जाए।
  2. यदि आप किसी चीज को नहीं जानते हैं तो उसे जानने में कभी भी संकोच या शर्म महसूस न करें।
  3. नफरतसे भरे दिल में प्यार जगाने से, पहाड़ को धूल में बदलना आसान हैं।
  4. जब ज्ञान की बात आती है तो मौन में कोई अच्छाई नहीं होती है, जिस तरह अज्ञान की बात होने पर बोलने में कोई भलाई नहीं होती है।
  5. आपकी आत्माएं अनमोल हैं, और इसकी कीमत केवल स्वर्ग के बराबर हो सकती हैं। इसलिए, उन्हें केवल उस कीमत पर ही बेचें।
  6. जीभ एकशेर की तरह है, अगर आप इसे ढीली कर देते हैं, तो यह किसी को घायल कर देगी।
  7. यदि आप दयालुता के प्राप्तकर्ता हैं, तो इसे याद रखें। यदि आप दयालुता के दाता हैं, तो इसे भूल जाइए!
  8. ज्ञान धन से बेहतर है, ज्ञान आपकी रक्षा करता है लेकिन धन, आपको इसकी रक्षा करनी होगी।
  9. लालच स्थायी गुलामी है।
  10. एक दोस्त द्वारा ईर्ष्या का मतलब उसके प्यार में दोष है।
  11. बहुत ज्यादा आलोचना न करें। बहुत ज्यादा आलोचना, नफरत और बुरे बर्ताव की ओर ले जाती है।
  12. किसी के नुक़सान में खुशी न दिखाएँ, क्योंकि आपके पास भविष्य में आपके लिए क्या है, इसका आपको कोई ज्ञान नहीं है।
  13. उन पापों से डरें जो आप गुप्त रूप से करते हैं क्योंकि उन पापों का गवाह खुद न्यायाधीश है। अल्लाह से डरे। अल्लाह तुम्हारे कृत्यों को देख रहा है।
  14. कभी-कभी आपकी प्रार्थनाएँ स्वीकार नहीं की जाती हैं, क्योंकि आप अक्सर अनजाने में वो चीज़े मांगते हैं जो वास्तव में आपके लिए हानिकारक हैं।
  15. खूबसूरत लोग हमेशा अच्छे नहीं होते हैं, लेकिन अच्छे लोग हमेशा खूबसूरत होते हैं।
  16. अपने अंदर के बुरे को देखें, और दूसरों के अंदर अच्छे को देखें।
  17. यदि आप किसी को याद करते हैं जब आप खुश होते हैं, तो बस यह जान लें कि आप उनसे प्यार करते हैं और अगर आप दुखी होने पर किसी को याद करते हैं तो बस यह जान लें कि वे आपसे प्यार करते हैं।
  18. जो आपको भूल गया, उसके साथ संपर्क में रहें, और जो आपके साथ अन्याय करते हैं, उन्हें क्षमा करें, और जो आपसे प्यार करते हैं, उनके लिए प्रार्थना करना बंद न करें।
  19. धैर्यके द्वारा महान कार्य सम्पन्न होते हैं।
  20. अपनीमाँसे तेज़ आवाज में बात ना करे, जिसने आपको सिखाया कि कैसे बोलना है।
  21. एक दोस्त को तब तक दोस्त नहीं माना जा सकता जब तक कि उसे तीन मौकों पर परखा न जाए: ज़रूरत के समय में, आपकी पीठ के पीछे, और आपकी मृत्यु के बाद
  22. जब गलत साबित हो जाते हैं, तोबुद्धिमानखुद को सही करता है और अज्ञानी तर्क करता है ।
  23. जब अल्लाह ने आपको स्वतंत्र बनाया है तो दूसरों के गुलाम मत बनो।
  24. अल्लाह से डरो और तुम्हारे पास किसी और से डरने का कोई कारण नहीं होगा।
  25. हमारे दुश्मन यहूदी या ईसाई नहीं हैं, लेकिन हमारे दुश्मन हमारी अज्ञानता हैं।
  26. क्रोध के समय में एक व्यक्ति का सच्चाधैर्यदिख जाता है।
  27. सबसे अच्छा ज्ञान वह है जो श्रोता को लाभान्वित करता है।
  28. बहुमत का पालन न करें सच्चाई का पालन करें।
  29. अल्लाह को याद रखना बुद्धि की रोशनी है, आत्माओं का जीवन है, और दिलों की चमक है।
  30. यदि एक रात आप किसी को पाप करते हुए देखते हैं, तो कल उसे पापी के रूप में मत देखना। हो सकता है उसने रात के दौरान पछतावा किया हो और आपको पता न चला हो।
  31. गरीबों के सामने अपने धन के बारे में बात न करें।
  32. बीमार के सामने अपने अच्छेस्वास्थ्यके बारे में बात न करें।
  33. भरोसा और सब्र रखने भर से फतह हासिल हो सकती हैं।
  34. स्पष्ट मना कर देना हजारो झूट बोलने और झूठे वायदे करने से हजार गुना अच्छा हैं।
  35. किसी पर उंगली उठाना वो लोग अपनाते हैं जो स्वय को अच्छा और बेहतर बनाने में नाकाफी होते हैं।
  36. हर व्यक्ति के तीन ही दुश्मन और दोस्त होते हैं। तुम्हारा दोस्त, दोस्त का दोस्त और उसका दोस्त। दुश्मन भी इसी क्रम में बने होते होते हैं।
  37. जब दुनिया आपकों हराकर गिरा दे, तो वह दुआ की सबसे अच्छी स्थति हैं।
  38. हर व्यक्ति को सच्चाई अच्छे की तरफ ले जाती हैं और जन्नत का दरवाजा खोलती हैं।
  39. विनम्रता सबसे बड़ी मौन प्रार्थना हैं।
  40. भीख मागने से बदतर कोई कर्म इस दुनिया में नही हैं।
  41. अपने खुदा पर यकीन रखो, डरो और बचो केवल बुरे कर्मो से।

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