शिव आभूषण नागो की पूजा करने से सब दुःख दूर होंगे

(मो0 नदीम) एव समीर मिश्रा.

सावन का महीना कई त्योहारो का रूप लिए हुए है इस महीने मनाए जाने वाले त्योहारो में सबसे ज्यादा प्रमुखता  नागपंचमी को दी जाती है इसलिए हिन्दू धर्म इसे पूरी श्रद्धा भाव से मनाता है  आज के दिन भगवान शिव के आभूषण कहे जाने वाले नागो की पूजा की जाती है लोगो का मानना है कि आज के दिन नागो की पूजा करके आध्यात्मिक शक्ति सिद्धिया एव अपार धन प्राप्त किया जा सकता है लोगो का ये भी कहना है अगर नागपंचमी के दिन पूजा करवाने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है लेकिन कुछ लोग इसे शुभ नहीं मानते है

ऐसी भी धारणाए लोगो में है कि पाताल लोक की धरती में कही अकूत खजाना छिपा हुआ है जिसे नागपंचमी के दिन नागो की पूजा करके हासिल किया जा सकता है इसलिए जिनके जीवन में धन शोहरत की कमी होती है उन्हें साधू तांत्रिक नागो पूजा द्वारा प्रसन्न करने की सलाह देते है इसके अलावा किसी की कुंडली में राहु केतु की ग्रह दशा खराब चल रही हो तो वो आज के दिन विशेष् नागो की पूजा करके अपनी राहु केतु ग्रह दशा को सही स्थिति में ला सकता है कुछ लोगो की कुंडली में विषकन्या अथवा अश्वगन्धा जैसे योग है उन लोगो को आज के दिन भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए शिव जी प्रसन्न हो जाएंगे लोगो में ये भी धारणा है जिन लोगो को भयानक और  डरावने सपने आते हो या फिर सर्पो से भय लगता हो उन्हें नागो की उपासना करनी चाहिए आज के दिन बशर्ते उन्ही नागो की जो शिव आभूषण स्वरूप हो नागपंचमी के दिन नागो को मारना सख्ती से मना है साथ ही सावन के महीने में धरती खोदना भी मना होता है आज के दिन व्रत भी रखा जाता है और व्रत रखे व्यक्ति  अपने हाथो से नागो को दूध व् खीर खिलाता है ये परम्परा हजारो सालो से चली आ रही है इसके अलावा आज के दिन लोग अपने घरो की दिवारो पर नागो साँपो की आकृति बनाकर पूरी श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना करते और भगवान से घर की सुख शांति एव समृद्धि के लिए कामना करते है 
शायद इसलिए पीटी जाती है गुड़िया
शास्त्रो की मानी जाए तो इस परम्परा की शुरुआत इस धारणा के साथ प्रचलित हुई थी राजा परीक्षित की मृत्य तक्षक नाग के काटने से हुई थी काफी समय बीत जाने के बाद तक्षक नाग चौथी पीढ़ी में जन्मी कन्या का विवाह राजा परीक्षित की चौथी पीढ़ी के राजकुमार से हुआ एक दिन कन्या ससुराल की एक महिला को ये सारा रहस्य बताकर किसी को भी ना बताने के लिए कहा लेकिन उस महिला ने ये रहस्य की बात अपनी करीबी महिला को बताया और उसे भी किसी और को बताने के लिए मना किया लेकिन हुआ उल्टा देखते ही देखते ये रहस्य पूरे राज्य में आग की तरह फ़ैल गया इस रहस्य के उजागर होने से तक्षक के तत्कालीन राजा को क्रोध आ गया उसने पूरे राज्य की महिलाओ को बन्दी बनाकर भरे बाजार कोड़ो से पिटवाकर मरवा दिया राजा को इस बात से क्रोध आया इन महिलाओ के पेट में कोई बात हजम नहीं होती है शायद तभी से लोग नागपंचमी के दिन गुड़िया को लाठी डंडो से पीटते है हालॉकि कुछ महिला संगठन इसे दकिया नूसी परम्परा मानते हुए इसका विरोध भी करती है लेकिन आज भी गावो में इस प्रथा को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है

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