उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दो बेटियाँ की जलाकर हत्या, कब चरितार्थ होगा बेटी बचाओ, बेटी पढाओ

अनिला आज़मी

बेटी बचाओ बेटी पढाओ का नारा सुनते सुनते आपके भी कान पक रहे होंगे। हकीकत के आईने में इस नारे को उतार कर देखे तो कही न कही हमारे देश में बेटियाँ आज भी असुरक्षित है। इस नारे की हम विवेचना तो नही कर रहे है। मगर फिर भी कही न कही इस नारे को सुनकर यह आभास होता है कि आज भी हमारे मुल्क में बेटियाँ असुरक्षित है। तभी तो हमारे नारे में बेटी बचाओ जैसे शब्द का हमको प्रयोग करना पड़ रहा है। मात्र ३ दिनों के अन्दर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दो बेटियों को जिंदा जला दिया जाता है। कार्यवाही के नाम पर एक आरोपी की मौके से गिरफ़्तारी और स्थानीय थाने पर कुछ उलटफेर के अलावा और क्या हुआ ? मगर दोनों ही घटना में कही न कही कानून व्यवस्था की धज्जिया उडती दिखाई दे रही है। ऐसा नही है कि कानून व्यवस्था को पहली बार कटघरे में खड़ा किया गया है। मगर इस बार शायद उत्तेजना कह ले या फिर समाज का इस घटना के विरुद्ध गुस्सा कह ले। सडको पर उतर रहा है।

आपको याद होगा कि बिना हेलमेट की गाड़ी चलाते हुवे लोगो के चालान काटने का नियम प्रदेश में हर जिले में चला था। ध्यान दे आप तो जिसने कभी जन्म में हेलमेट ख़रीदा नही होगा उसके सर पर भी हेलमेट नज़र आने लगा था। हमारा ये बात बताने का मकसद यहाँ ये है कि बस एक बार कानून व्यवस्था का पूरा पालन करते हुवे दो चार बलात्कारियो को पूरी सजा मिले तो। अपराध खुद ब खुद कम हो जायेगा। आपको बताते चले कि उत्तराखंड और यूपी में 2 लड़कियों को पेट्रोल डालकर जला दिया गया, दोनों लड़कियों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन इलाज़ के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया था। अब दोनों राज्यों में कानून व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताते चले कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के पल्ली गांव की एक बहादुर बेटी ने 5 दिन ज़िन्दगी और मौत से जूझने के बाद रविवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में आखिरी सांस ली और फिर उसके गांव में सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से उसका अंतिम संस्कार किया। बीएससी सेकेंड ईयर में पढ़ने वाली ये बहादुर बेटी 16 दिसंबर को कॉलेज के प्रैक्टिकल के बाद स्कूटी से घर लौट रही थी, तभी पेशे से ड्राइवर 30 साल के मनोज सिंह उर्फ बंटी नाम के शख्स ने उसका रास्ता रोककर रेप करने की कोशिश की। लेकिन विरोध करने पर उसने नेहा के ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। 70 प्रतिशत जली हालात में नेहा को एयर एंबुलेंस से दिल्ली के सफदरजंग भेजा गया। आरोपी को तो मौके से गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन बेटी की जान नहीं बचाई जा सकी। इसे लेकर उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन भी हुए। घर वालों की मांग है कि इंसाफ ऐसा हो जो दूसरों के लिए सबक बने।

वहीं 18 दिसंबर को आगरा के मलपुरा थाना क्षेत्र में 2 बाइक सवार और हेलमेट पहने अज्ञात लोगों ने दसवीं में पढ़ने वाली 15 साल की छात्रा पर पेट्रोल छिड़ककर उस समय आग लगा दी, जब वो स्कूल से घर लौट रही थी। उसी समय वहां से गुजर रहे बस चालक ने अपनी गाड़ी में रखे फायर सिलेंडर से आग बुझाई। 50 प्रतिशत जली गंभीर हालत में छात्रा को आगरा से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर किया गया, यहां उसकी इलाज़ के दौरान गुरुवार को उसकी मौत हो गयी। इस घटना से नाराज़ स्थानीय लोगों ने कैंडल मार्च निकाला और बाजार बंद करा दिए। लोगों के विरोध को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

यूपी पुलिस के सारे दावों की हवा निकल गई है। बात-बात पर एनकाउंटर करने वाली योगी की पुलिस फेल हो गई है। एक मासूम बेगुनाह लड़की को सरेआम सड़क पर जला दिया जाता है और उसके कातिल 6 दिन बाद भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। और उस पर इंसानियत को शर्मसार करने वाली बात ये कि दलित छात्रा की मौत सियासत करने वाले तमाम नेता उसके घर जाकर अफसोस तो जता रहे हैं। स्थिति तो ऐसी है कि फोटो खिचवाने की छपास रोगियों की भीड़ तो है लेकिन उसके घरवालों का हाल कोई नहीं जानना चाहता। नेता तस्वीरें खींचाने के लिए भीड़ लेकर वहां जाते हैं। पानी मांगते हैं और बड़ी बड़ी बातें करके लौट आते हैं। इस दुनिया से हमेशा के लिए जा चुकी उस बेगुनाह की मां ने आगरा के सांसद के सामने कहा “6 दिन हो गए हैं अपराधी नहीं पकड़े गए। नेता आते हैं पानी पिलाने को कहते हैं। घर में 6 दिन से चूल्हा नहीं जला है। पानी नहीं है। कहां से पिलाएं। कहां से नेताओं की खातिरदारी करें।” आगरा के लालउ गांव में बीजेपी सांसद रमाशंकर कठेरिया के सामने उस मां का गुस्सा फूट पड़ा। सिर्फ गुस्सा ही नहीं फूटा बल्कि वो  फूट-फूट कर रोने लगी।

बताते चले कि घटना उस सड़क पर हुई थी जो सड़क 24 घंटे व्यस्त रहती है और वारदात के दिन भी वहां बहुत भीड़ थी। लेकिन हैरानी की बात है कि किसी ने भी हमलावर को नहीं देखा। संजलि हमले के बाद वहां काफी देर तक तड़पती रही। संजलि को जिंदा जला दिया गया। गंभीर हालत में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया। जहां उसने दम तोड़ दिया। वारदात के बाद पुलिस ने संजलि के चचेरे भाई से पूछताछ की। दूसरे दिन उसने भी जहर खाकर आत्महत्या कर ली। परिवार वालों का आरोप है पुलिस ने भाई को टार्चर किया। इसलिए उसने ऐसा कदम उठाया। पुलिस आत्महत्या की जांच भी कर रही है। पुलिस का दावा है की उसके हाथ कुछ सुराग लगे हैं। जल्द ही हत्यारों को गिरफ्तार किया जाएगा। मगर बात बात में एनकाउंटर करने वाली योगी की पुलिस के हाथ वारदात के 6 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं लगा। वहीं गांव में नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजबब्बर ने यूपी सरकार पर हमला बोला। तब जवाब में आगरा के सांसद और एससीएसटी कमीशन के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया ने कहा “इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, परिवार को दस लाख देंगे और कातिल जल्द पकड़े जाएंगे।” मौत पर सियासत होना अब देश में नया नहीं है, लेकिन जिस तरह से बीच सड़क पर संजलि को जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार दिया गया। उससे आगरा समेत पूरे यूपी की लचर कानून व्यवस्था सबके सामने आ गई है। सवाल तो कई है जिसके जवाब योगी की एनकाउंटर पुलिस के पास या फिर इन नेता लोगो के पास नही होंगे। क्या केवल दस लाख रुपया देने से एक बेटी का दर्द ख़त्म या कम हो जायेगा। संजन्ली की मौत ने देश के हर माँ बाप के पेशानी पर एक बल डाल दिया है। वो माँ बाप खास तौर पर परेशान रहने लगे है जिनकी बेटी घर से बाहर स्कूल अथवा कालेज जाती है। रही मुआवज़े की बात तो क्या किसी को याद है बुलंदशहर हिंसा में गोली से मारे गये पथराव कर रहे युवक के परिजनों को कितना मुआवजा देने की घोषणा हुई थी। शायद इस बेटी के लिये एक वोट बैंक न हो मगर हमारे राजनीतिज्ञ ये भूल रहे है कि एक बेटी की मौत ने पुरे इलाके में आज 6 दिन से चूल्हे बुझा दिये है।

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