किसान महापंचायत में बोले टिकैत : “संग्राम विश्राम” की घोषणा सरकार ने किया है, किसानो का संघर्ष जारी रहेगा

आदिल अहमद/तारिक खान

लखनऊ। सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान होने और प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसानो को घरो और खेतो में वापस जाने की अपील के बाद भारतीय किसान यूनियन ने आगे की रणनीति के तहत आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक किसना महापंचायत का आयोजन किया। किसान महापंचायत के बाद संयुक्त भारतीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आन्दोलन खत्म न करने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि संग्राम विश्राम की घोषणा भारत सरकार ने किया है। मगर किसानो का संघर्ष जारी रहेगा।

लखनऊ के इको गार्डन में आज सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत में भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ऐलान किया कि अभी आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मसले अभी बहुत हैं जिनका हल निकलने के बाद ही आंदोलन समाप्त होगा। जिस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने एक रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी थी जिसमें एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने की सिफारिश की थी। अब उसे आखिर क्यों लागू नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि स्पष्ट जवाब देना होगा घुमा फिरा कर काम नहीं चलेगा।

राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को अपनी बात समझाने में किसानों को 1 साल का समय लगा। मसला एक नहीं है कई हैं। सीड बिल, एमएसपी गारंटी, पोलूशन बिल, दूध पॉलिसी, बिजली बिल तमाम मुद्दे हैं जिन पर किसानों का संघर्ष अभी चलेगा। उन्होंने कहा कि जो 17 कानून पार्लियामेंट में लाए जा रहे हैं उन्हें भी मंजूर नहीं होने दिया जाएगा और देश भर में उनका विरोध होगा। जब तक बातचीत के जरिये बैठकर सरकार हर मसले पर बात नहीं करेगी तब तक किसान वापस अपने घरों को नहीं जाएंगे।

राकेश टिकैत ने कहा कि अजय मिश्रा टेनी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री एक चीनी मिल का लखीमपुर खीरी में उद्घाटन करने जा रहे हैं। यदि टेनी ने चीनी मिल का उद्घाटन किया तो किसान सारा गन्ना वहां के डीएम के घर पर डालकर आएंगे। उन्होंने अपनी मांगे दोहराई कि जब तक किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं होते एमएसपी पर गारंटी कानून नहीं बनता, फसलों का उचित दाम नहीं मिलता ऐसे तमाम मुद्दों पर बात नहीं होती तब तक कोई समझौता नहीं होगा।

उन्होने कहा कि गन्ने का रेट घोषित करने में यूपी सरकार थर्ड नंबर पर आई। ऊपर से अभी तक किसानों को बकाया नहीं दिया गया है। उनके बकाया का भुगतान तत्काल किया जाए। राकेश टिकैत ने कहा कि लखनऊ में एयरपोर्ट के लिए 11 सौ एकड़ जमीन का अधिग्रहण तो किया गया, लेकिन किसानों को उसके बदले एक फूटी कौड़ी नहीं दी गई। कह दिया गया कि सन 1942 में जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया था। यह मजाक है, उन्होंने कहा कि इसका हिसाब होगा और इस बार बरसात के बाद लखनऊ एयरपोर्ट की जमीन पर किसान बुवाई करेंगे। इन पीड़ित किसानों का संघर्ष अवश्य होगा। किसानों से आह्वान किया गया कि 26 नवंबर को गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। साथ ही 29 तारीख से प्रतिदिन 1000 लोग 60 ट्रैक्टर संसद के तरफ निकलेंगे। उन्होंने कहा कि 29 से 3 तारीख तक संसद में कानून वापस लेकर बरगलाने की कोशिश की जाएगी कि अब उनकी मांगे पूरी हो गई लेकिन इस बहकावे में नहीं आना है, क्योंकि आगे की जंग अभी जारी रहेगी।

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