जेल से रिहा होकर अब्दुल्लाह आज़म पहुचे रामपुर, पुलिस को देख बोले, जितनी ज़्यादतियां होनी थी हो चुकी

आफताब फारुकी

रामपुर। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता, रामपुर सांसद आजम खान के पुत्र अब्दुल्लाह आजम कल 687 दिन जेल में गुज़ारने के बाद रिहा होकर अपने गृह जनपद रामपुर पहुंचे। रामपुर में उनके घर को रंगीन रोशनियों से सजाया गया था। वह घर पहुच पाते उसके पहले ही उनके घर से महज़ चंद कदमो की दुरी पर भारी पुलिस फोर्स ने उन्हें रुकने का इशारा किया। जिस पर वे पुलिस पर तंज कसने से नहीं चूके। उन्होंने पुलिस पर तंज़ कसते हुवे कहा कि अपने घर पर कोई नही आयेगा, इतना अन्याय न करो, ऐसा अन्याय न करो, किसी के घर पर कोई न आये।

अब्दुल्लाह आजम ने रामपुर पहुंचकर उनके घर के निकट तैनात पुलिस फोर्स को देखकर कहा कि ”घर पर कोई नहीं आएगा, इतना अन्याय ना करो, ऐसा अन्याय ना करो, किसी के घर पर कोई ना आए, यह है लोकतंत्र, घर पर लोग नहीं आ सकते। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने के बाद यह हाल है रामपुर में। घर पर आने से लोगों को रोक रहे हैं यह है लोकतंत्र।” आचार संहिता के नाम पर और कोविड प्रोटोकॉल के नाम पर ऐसे शोषण कर रहे हैं, यहां घर पर लोग नहीं आ सकते।

अब्दुल्ला आजम ने पुलिस पर तंज करते हुए खाना खाने की इजाजत मांगी। उन्होंने कहा, भाई खाना खा लें घर जाकर? आप कहो वह भी ना खाएं, कह दो, कमिश्नर साहब ने मना कर दिया होगा। अब्दुल्लाह आजम ने कहा कि हमारे साथ जितनी ज्यादती होनी थी हो ली। भैंस चोर है, बकरी चोर है जो ज्यादतियां और भी रह गई हैं वह भी कर लो, लेकिन ऊपर वाला है आज नहीं तो कल इंसाफ जरूर करेगा।

अब्दुल्लाह आजम ने कहा मैं तो जेल से निकला था। मैंने कहा था कोई अगर मुझे मोहब्बत से लेने आता है तो मैं मोहब्बत को नहीं रोक सकता। मेरी खुशनसीबी है कि मुझे प्यार करने वाले वहां तक आए। ना तो कोई काफिला था, ना कोई कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। उन्होंने कहा रामपुर में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता चुनाव आयोग को संज्ञान लेना चाहिए। अब्दुल्लाह आजम ने जेल में बिताए गए 23 महीने के सवाल पर कुछ इस तरह कहा….! जो हमारे साथ हुआ उसके बाद आपको क्या लगता है कैसे कटा होगा। एक अकेले आजम खान साहब जेल में हैं।

उन्होंने कहा आजम खान की जान को खतरा है। जितना जुल्म हो सकता था और जितनी तकलीफ दी जा सकती थी मुझे और मेरे परिवार को, मेरी मां को, मेरे वालिद को दी गई है और आज भी मेरे वालिद को वहां जान का खतरा है और अगर कुछ भी हुआ तो उसका जिम्मेदार सरकार और जेल प्रशासन होगा। अब्दुल्लाह आज़म इसके बाद अपने घर के अन्दर चले गए। वही रामपुर सियासत में अब एक बार फिर से बड़ा बदलाव आने की संभावना बनी हुई है।



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