संघ की पत्रिका “पांचजन्य” में काम करने वाले निशांत आज़ाद को “सर तन से जुदा” धमकी देने वाला और कोई नही उसका मित्र प्राणप्रिय वत्स था, चढ़ा गाज़ियाबाद पुलिस के हत्थे तो बताया क्यों दिया था धमकी

सरताज खान

डेस्क: गाज़ियाबाद पुलिस ने उस शख्स को आखिर हिरासत में ले लिया है जिसने संघ की पत्रिका पांचजन्य में काम करने वाले निशांत आज़ाद को “सर तन से जुदा” की धमकी दिया था। गिरफ्तार अभियुक्त का नाम प्राणप्रिय वत्स है और वह निशांत का पूर्व परिचित है। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद प्राणप्रिय ने बताया कि निशांत से उसने पैसे उधार ले रखे थे। जिसकी वापसी के लिए निशांत उस पर दबाव बना रहा था। इससे बचने के लिए उसने ये धमकी दिया था।

फोटो साभार: लल्लनटॉप

खबरिया वेबसाईट लल्लनटॉप के सोम शेखर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि  पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में बताया है कि आरोपी और निशांत एक-दूसरे को ढाई साल से जानते हैं। निशांत ने आरोपी को ढाई लाख रुपए उधार दे रखे थे और बार-बार उससे उधार वापस मांग रहे थे। तो आरोपी ने निशांत को डराने और ध्यान भटकाने के लिए उन्हें ये धमकी दी।

बताते चले कि निशांत को “सर तन से जुदा” की धमकी का मामला ग़ाज़ियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी। मामला संघ के पत्रकार से जुडा होने के कारण मामले को मीडिया ने भी जमकर उछाला। इस मामले के खुलासे के लिए पुलिस की साइबर और सर्विलांस टीमें जी जान से जुट गईं थी। मीडिया से बात करते हुए निशांत ने ये भी बताया कि मेसेज के बाद उन्हें कॉल और वीडियो कॉल भी आया था, जिसका जवाब उन्होंने नहीं दिया था। इस बीच मीडिया में खबरें छपीं कि निशांत को कट्टरपंथियों ने धमकी दी है। ।

गाज़ियाबाद में पहले भी ऐसा फेक मामला आ चूका है सामने

कुछ दिन पहले ग़ाज़ियाबाद के ही एक डॉक्टर ने ऐसी ही धमकी मिलने की बात कही थी। डॉक्टर अरविंद वत्स ने कहा था कि हिंदू संगठनों का समर्थन करने के लिए उन्हें सर तन से जुदा की धमकी मिली। डॉक्टर वत्स ने बताया कि पहली बार उन्हें एक सितंबर की रात को इस नंबर से कॉल आई थी। उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया क्योंकि वो सो रहे थे। इसके बाद फिर उसी नंबर से 7 सितंबर को कॉल आया। फोन करने वाले शख्स ने कहा कि अगर वो हिंदू संगठनों का समर्थन करेंगे, तो उनका सिर क़लम कर दिया जाएगा। मामला पुलिस में दर्ज किया गया। पुलिस की जांच बैठी। इसके बाद 18 सितंबर को पुलिस ने बताया कि ये मामला फर्जी है। पुलिस ने कहा कि डॉक्टर ने ख़ुद ही ये मामला रचा था और पॉपुलैरिटी के लिए कहानी बनाई।

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