बिहार: नीतीश कुमार के गढ़ नालंदा में बर्बरता की पार हुई इन्तेहा, अज्ञात महिला का मिला शव, मृतक के शरीर पर ठोकी गई है कीले, पुलिस जुटी जाँच में

अनिल कुमार
पटना: बिहार का नालंदा अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। नालंदा से ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आते हैं। मगर नालंदा ने बुधवार को कुछ ऐसा देखा कि हर कोई सहम गया। एक महिला का शव मिला। पैरों में 10 कीलें ठोंकी गईं थीं। हैरानी की बात ये है कि घटना के 48 घंटे से अधिक गुजरने के बाद भी पुलिस अब तक इस बारे में कुछ भी नहीं पता लगा पाई है।

पोस्टमार्टम अब तक नहीं होने से पता नहीं है कि महिला की मौत का कारण क्या है। मगर ये बात तो तय है कि महिला को बहुत तड़पाकर मारा गया या मारने के बाद बर्बरता की गई है। महिला इस दौरान न जाने कितना तड़पी होगी। इसका मतलब ये है कि महिला को मारने वाला उससे बहुत ज्यादा नफरत करता होगा। साथ ही मानसिक रूप से बहुत बीमार होगा। पुलिस की थ्योरी को अगर मान लें कि महिला को किसी और जिले या राज्य में मारा गया और नालंदा में लाकर फेंका गया तो भी ये पता चलता है कि हत्या करने वाला संसाधनों वाला आदमी होगा। क्योंकि इतनी दूर शव को लाने के लिए उसने अपनी गाड़ी का ही इस्तेमाल किया होगा और पूरी प्लानिंग से हत्या की गई होगी।
फिलहाल पुलिस का सारा ध्यान और जांच अभी महिला की पहचान करने पर है। डीएसपी सुमित कुमार के अनुसार, नालंदा के साथ-साथ सभी नजदीकी जिलों शेखपुरा, नवादा, पटना, जहानाबाद में भी महिला की तस्वीरें भेजी गईं, मगर पहचान नहीं हो सकी। पुलिस ने अब तक पोस्टमार्टम भी नहीं कराया है। बिसरा प्रिजर्व करना है या नहीं, इस पर भी अभी निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये अपराधियों के हौसले बढ़ाने वाली बात नहीं है?
नालंदा के डीएसपी सुमित कुमार से जब ये सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि कुछ स्थानीय लोगों ने इस बारे में उन्हें भी बताया है, लेकिन जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में ये बात तय नहीं हो जाती, तब तक इसे मान लेना सही नहीं होगा। दरअसल, नालंदा जिले में डायन का शक होने पर महिलाओं के पैरों में कील ठोंककर उन्हें नदी में बहा दिया जाता है। इसके पीछे अंधविश्वास ये है कि महिला मौत के बाद फिर भूत-प्रेत नहीं बनेगी और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।











