बड़ा सियासी बवाल: डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी पर विपक्ष ने लगाया ‘ज़मीन चोरी’ का आरोप..!

शफी उस्मानी
PNN24 News, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में इस वक्त ज़बरदस्त भूचाल आया हुआ है। मामला जुड़ा है राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की एक कंपनी से, जिस पर भूमि लेनदेन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। विपक्ष इस मुद्दे पर पूरी तरह से हमलावर है और इसे ‘ज़मीन चोरी’ करार दे रहा है।
आरोप है कि पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी, अमाडिया होल्डिंग्स एलएलपी ने पुणे के कोरेगांव पार्क इलाके में करीब 40 एकड़ सरकारी ‘महार वतन’ जमीन को कौड़ियों के भाव खरीद लिया।
- बाज़ार मूल्य: इस जमीन का अनुमानित बाज़ार मूल्य लगभग 1800 करोड़ रुपये आंका गया है।
- कथित खरीद मूल्य: आरोप है कि यह जमीन मात्र 300 करोड़ रुपये में खरीदी गई।
- स्टाम्प ड्यूटी में छूट: इतना ही नहीं, यह भी आरोप है कि सौदे में नियमों को ताक पर रखकर स्टाम्प ड्यूटी में भी भारी छूट दी गई, जो कि अवैध है।
यह जमीन ‘महार वतन’ श्रेणी की बताई जा रही है, जिसका मतलब है कि यह सरकारी नियमों के तहत किसी निजी कंपनी को बेची नहीं जा सकती थी। नियमों का उल्लंघन कर यह खरीद की गई, जिससे विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
राहुल गांधी ने कहा ‘ज़मीन चोरी’
इस पूरे मामले पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार को सीधे घेरे में लिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में इस लेनदेन को ‘ज़मीन चोरी’ करार दिया।
“महाराष्ट्र में दलितों के लिए आरक्षित 1800 करोड़ रुपये की सरकारी ज़मीन मंत्री के बेटे की कंपनी को सिर्फ 300 करोड़ रुपये में बेच दी गई। ऊपर से स्टाम्प ड्यूटी भी हटा दी गई। मतलब एक तो लूट, और उस पर कानूनी मुहर में भी छूट। ये उस सरकार की ‘ज़मीन चोरी’ है, जो खुद ‘वोट चोरी’ से बनी है।”
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार उन्हीं ‘लुटेरों’ पर टिकी है जो दलितों और वंचितों का हक हड़पते हैं।
अजित पवार की सफाई और सरकार का एक्शन
विवाद गहराने के बाद, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और मामले पर सफाई दी। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें इस डील की पहले कोई जानकारी नहीं थी और इसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है।
ताज़ा घटनाक्रम:
- डील रद्द: विवाद बढ़ता देख, अजित पवार ने घोषणा की कि विवादित भूमि का सौदा रद्द कर दिया गया है।
- जांच समिति: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खरगे के नेतृत्व में उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट एक महीने में आएगी।
- अधिकारी निलंबित: तत्काल कार्रवाई के तौर पर, इस डील से जुड़े पुणे के तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है।
- FIR दर्ज: इस मामले में पार्थ पवार के रिश्तेदार और दो सरकारी अधिकारियों समेत तीन लोगों पर FIR भी दर्ज की गई है।
अजित पवार ने कहा है कि अगर किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष
पार्थ पवार की कंपनी से जुड़ा यह भूमि सौदा महाराष्ट्र की ‘महायुति’ सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट बन गया है। एक तरफ डिप्टी सीएम के बेटे पर करोड़ों की ‘जमीन चोरी’ का आरोप है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे को ‘दलितों के हक़’ से जोड़कर आक्रामक रुख अपना रहा है। अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी।












