नेशनल हेराल्ड मामला: पढ़े साल 2012 से 2025 तक की पूरी टाइमलाइन

आदिल अहमद
डेस्क: नेशनल हेराल्ड मामला भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित कानूनी विवादों में से एक रहा है। सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू होकर कोर्ट द्वारा ईडी की चार्जशीट खारिज करने तक का सफर यहाँ सिलसिलेवार तरीके से दिया गया है:
शुरुआत और कानूनी प्रक्रिया (2012 – 2015)
- 2012: बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने ‘यंग इंडियन लिमिटेड’ के ज़रिये ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (AJL) का गलत तरीके से अधिग्रहण किया।
- 2014: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को समन जारी किया।
- दिसंबर 2015: सोनिया गांधी और राहुल गांधी कोर्ट में पेश हुए, जहां उन्हें जमानत मिल गई।
ईडी की एंट्री और जांच (2016 – 2021)
- 2016: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी।
- 2018: केंद्र सरकार ने नेशनल हेराल्ड हाउस (दिल्ली) को खाली करने का आदेश दिया, जिसे बाद में अदालतों में चुनौती दी गई।
- 2020: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच तेज कर दी और AJL की संपत्तियां कुर्क करना शुरू किया।
पूछताछ और तीखा विवाद (2022 – 2024)
- जून-जुलाई 2022: ईडी ने राहुल गांधी से करीब 50 घंटे और सोनिया गांधी से कई दिनों तक पूछताछ की। कांग्रेस ने इसके खिलाफ देशभर में ‘सत्याग्रह’ और विरोध प्रदर्शन किए।
- अगस्त 2022: ईडी ने दिल्ली स्थित नेशनल हेराल्ड के दफ्तर में यंग इंडियन के परिसर को सील कर दिया।
- नवंबर 2023: ईडी ने यंग इंडियन और AJL की 751 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया।
2025: कोर्ट का बड़ा फैसला
- दिसंबर 2025: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में अपनी विस्तृत चार्जशीट (आरोपपत्र) दाखिल की।
- 16 दिसंबर 2025: दिल्ली की विशेष अदालत ने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने माना कि प्रक्रियात्मक और कानूनी आधार पर चार्जशीट में पर्याप्त ठोस आधार नहीं हैं।
- 17 दिसंबर 2025: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया और सरकार से इस्तीफे की मांग की।
मुख्य विवाद क्या था?
आरोप था कि कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड को दिए गए 90 करोड़ रुपये के कर्ज को ‘यंग इंडियन’ नामक कंपनी को मात्र 50 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिया, जिससे यंग इंडियन को नेशनल हेराल्ड की कीमती संपत्तियों पर मालिकाना हक मिल गया। कांग्रेस का कहना था कि यह एक चैरिटी के लिए किया गया व्यावसायिक बदलाव था और इसमें कोई वित्तीय लाभ नहीं लिया गया।









