2100 तक आधी रह जाएगी चीन की आबादी! खाली हो रहा पेंशन फंड और ‘आजादी’ की चाहत में युवा; क्या ढह जाएगा ड्रैगन का आर्थिक साम्राज्य?

तारिक खान
डेस्क: चीन में लगातार गिरती जन्म दर केवल एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं, बल्कि एक गहरे सामाजिक बदलाव का संकेत है। बीजिंग के युवा पॉपुलेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट (2024) की हालिया रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला सच सामने रखा है—चीन अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहाँ बच्चा पालना सबसे महंगा काम बन चुका है। लेकिन संकट की जड़ें सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं हैं।

2100 तक का भयावह अनुमान: संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेषज्ञों ने एक डरावनी भविष्यवाणी की है। उनके अनुमान के मुताबिक, यदि यही स्थिति बनी रही, तो साल 2100 तक चीन की आबादी घटकर आधी से भी कम रह जाएगी। इसका सीधा असर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है:
- कम होता वर्कफोर्स: काम करने वाले हाथों की कमी से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित हो रहा है।
- कमजोर कंज्यूमर सेंटीमेंट: आबादी कम होने से सामान खरीदने वाले ग्राहक कम हो रहे हैं, जिससे बाजार सुस्त पड़ रहा है।
खत्म हो रहा पेंशन का खजाना: चीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके बुजुर्ग हैं। चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंस ने चेतावनी दी है कि बुजुर्गों के लिए बनाया गया पेंशन फंड अब खत्म होने की कगार पर है।
- युवा काम की तलाश में शहरों में माता-पिता से दूर रह रहे हैं।
- बुजुर्ग अकेले पड़ रहे हैं और पूरी तरह सरकारी पेंशन पर निर्भर हैं।
- टैक्स देने वाले युवा कम हो रहे हैं और पेंशन लेने वाले बुजुर्ग बढ़ रहे हैं, जिससे यह सरकारी खजाना खाली होता जा रहा है।
चीन ने 2016 में ‘वन चाइल्ड’ और 2021 में ‘थ्री चाइल्ड’ पॉलिसी लाकर कोशिश तो की, लेकिन सांस्कृतिक और आर्थिक बदलावों ने सरकार की हर योजना पर पानी फेर दिया है। यह ‘डेमोग्राफिक टाइम बम’ चीन के भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।











