‘इलाहाबाद हाई कोर्ट की यूपी प्रशासन को कड़ी फटकार’; संभल में नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश रद्द, कोर्ट ने कहा— “काम नहीं कर सकते तो इस्तीफा दें अफसर”
"अगर कानून-व्यवस्था नहीं संभाल सकते तो इस्तीफा दें": इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल में नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश किया रद्द। जस्टिस अतुल श्रीधरन की कड़ी टिप्पणी। असदुद्दीन ओवैसी ने फैसले का स्वागत करते हुए यूपी पुलिस को घेरा।

आफताब फारुकी
प्रयागराज/संभल (PNN24 News): इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रशासन के एक विवादास्पद आदेश को सिरे से खारिज करते हुए कड़े तेवर दिखाए हैं। मामला संभल की एक मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने से जुड़ा था, जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
1. हाई कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस और जिला प्रशासन को आईना दिखाया।
- अधिकारियों को चुनौती: बेंच ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, “अगर पुलिस अधीक्षक (SP) और ज़िला कलेक्टर (DM) अपने जिले की कानून-व्यवस्था को नहीं संभाल सकते, तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर अपना ट्रांसफर ले लेना चाहिए।”
- आदेश का आधार: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक के इबादत करने के अधिकार को इस तरह प्रशासनिक आदेशों से सीमित नहीं किया जा सकता, खासकर निजी स्थानों पर।
2. क्या था प्रशासन का ‘अजीब’ आदेश?
संभल पुलिस और प्रशासन ने एक आदेश जारी किया था जिसमें एक निजी स्थान/मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या 20 से अधिक न होने की शर्त रखी गई थी। प्रशासन का तर्क था कि इससे इलाके में सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को शासन की विफलता माना।
3. ओवैसी का हमला: “यूपी में यह एक पैटर्न बन गया है”
एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए यूपी सरकार और पुलिस पर निशाना साधा।
- अधिकारों का हनन: ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है, आम लोगों की नहीं। यूपी में मुसलमानों को घर के अंदर नमाज पढ़ने पर भी हिरासत में लिया जा रहा है।”
- पुलिस को नसीहत: उन्होंने उम्मीद जताई कि यूपी पुलिस इस फैसले से सबक लेगी और नागरिकों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करेगी।
4. पैटर्न पर सवाल
कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला उन मामलों में नजीर बनेगा जहाँ स्थानीय प्रशासन ‘सुरक्षा’ के नाम पर धार्मिक गतिविधियों को प्रतिबंधित करने की कोशिश करता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पुलिस की अक्षमता का हर्जाना आम नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों की बलि देकर नहीं भुगतना होगा।
📊 केस फाइल: एक नज़र में (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| अदालत | इलाहाबाद हाई कोर्ट (प्रयागराज) |
| पीठ | जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन |
| मुद्दा | संभल में नमाजियों की संख्या 20 तक सीमित करना |
| कोर्ट का आदेश | प्रशासन का आदेश रद्द (Quashed) |
| मुख्य टिप्पणी | कानून-व्यवस्था न संभालने पर इस्तीफा दें DM-SP |












