शराब नीति केस में नया मोड़: केजरीवाल-सिसोदिया की रिहाई के खिलाफ हाई कोर्ट पहुँची CBI; अदालत ने एजेंसी पर की गई तीखी टिप्पणियों पर लगाई रोक
शराब नीति मामले में 'आप' नेताओं की मुश्किलें फिर बढ़ीं! दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को जारी किया नोटिस। ट्रायल कोर्ट की सीबीआई पर की गई सख्त टिप्पणियों पर लगाई रोक। पीएमएलए (PMLA) मामले की सुनवाई टालने के निर्देश।

आदिल अहमद
नई दिल्ली (PNN24 News): दिल्ली शराब नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं को मिली राहत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार (9 मार्च 2026) को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 21 लोगों के खिलाफ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई सीबीआई की उस याचिका पर हुई है जिसमें ट्रायल कोर्ट के ‘डिस्चार्ज’ (बरी) करने के फैसले को चुनौती दी गई है।
1. सीबीआई की दलील: ‘बिना ट्रायल के बरी करना गलत’
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई का पक्ष रखते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला “बिना मुकदमे के बरी करने” जैसा है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया और तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों की समीक्षा इस तरह की जैसे वह अंतिम फैसला सुना रही हो, जबकि यह केवल आरोप तय करने का चरण था।
2. जांच एजेंसी पर की गई टिप्पणियों पर स्टे
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने ट्रायल कोर्ट (राउज़ एवेन्यू कोर्ट) द्वारा सीबीआई और उसके जांच अधिकारियों के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणियों पर रोक लगा दी है।
- अदालत का रुख: जस्टिस शर्मा ने कहा, “जांच एजेंसी और अधिकारी के खिलाफ की गई किसी भी टिप्पणी और बयान के संबंध में मैं स्थगन आदेश जारी करती हूँ।”
- विभाग की साख: बता दें कि ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट को ‘भ्रामक’ बताया था और जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए थे, जिस पर अब हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है।
3. ED (PMLA) मामले की सुनवाई टली
हाई कोर्ट ने एक और बड़ा निर्देश देते हुए ट्रायल कोर्ट से कहा है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) मामले की सुनवाई तब तक के लिए टाल दे, जब तक कि सीबीआई की इस याचिका पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता।
-
कारण: चूंकि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सीबीआई की ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ (मूल अपराध) पर आधारित है, इसलिए मूल मामले में हाई कोर्ट के फैसले का इंतज़ार करना कानूनी रूप से अनिवार्य माना गया है।
4. क्या था निचली अदालत का फैसला?
बीते 27 फरवरी 2026 को स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने तब कहा था कि सीबीआई के पास प्रथम दृष्टया कोई ठोस सबूत नहीं है और पूरी कहानी केवल अटकलों पर आधारित है।












