‘दुधवा में जब “बाघ” पर भारी पड़े “भालू”: दो निडर भालुओं ने जंगल के राजा को पीछे हटने पर किया मजबूर; पर्यटकों के कैमरे में कैद हुआ हैरतअंगेज मुकाबला!’
दुधवा के जंगलों में 'जंगल बुक' जैसा मंजर: दो भालुओं के आगे बेबस दिखा 'तराई का राजा' बाघ। निडर भालुओं ने खदेड़ा, लखनऊ के पर्यटकों ने कैमरे में कैद किया हैरतअंगेज नजारा। सोशल मीडिया पर वायरल हुई बाघ और भालुओं की दुर्लभ भिड़ंत। PNN24 की विशेष वाइल्डलाइफ रिपोर्ट।

फारुख हुसैन
पलिया कलां, लखीमपुर खीरी (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व से प्रकृति के अद्भुत और दुर्लभ व्यवहार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। सोमवार शाम की सफारी के दौरान पर्यटकों ने देखा कि कैसे दो भालुओं ने मिलकर जंगल के सबसे ताकतवर शिकारी ‘बाघ’ को अपने इलाके से खदेड़ दिया। इस रोमांचक मुठभेड़ का वीडियो अब सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है।
1. लखनऊ के पर्यटकों के लिए बना यादगार पल
जानकारी के अनुसार, लखनऊ से आए सैलानियों का एक दल गाइड राजू और चालक मोनिश के साथ जंगल सफारी पर निकला था। घने जंगलों के बीच अचानक एक बाघ सड़क पर दिखाई दिया। अभी पर्यटक बाघ की खूबसूरती निहार ही रहे थे कि झाड़ियों से दो भालू निकल आए और बिना डरे बाघ की ओर बढ़ने लगे।
2. जब ‘राजा’ को छोड़ना पड़ा रास्ता
आमतौर पर भालू बाघ से दूरी बनाकर रखते हैं, लेकिन इस घटना में भालू काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने निडरता के साथ बाघ का पीछा करना शुरू कर दिया। भालुओं के इस संयुक्त हमले और साहस को देख बाघ को भी पीछे हटने और रास्ता बदलने पर मजबूर होना पड़ा। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भालू अक्सर अपने क्षेत्र (Territory) या शावकों की सुरक्षा के लिए इतने आक्रामक हो जाते हैं कि वे बाघ जैसे शिकारी से भी नहीं डरते।
3. गाइड और चालक की सूझबूझ
इस अद्भुत नजारे को सुरक्षित दूरी से दिखाने के लिए गाइड राजू और चालक मोनिश की सराहना की जा रही है। उन्होंने न केवल पर्यटकों को इस दुर्लभ पल का गवाह बनाया, बल्कि जंगल के सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए वाहन को सुरक्षित स्थान पर रखा। पार्क प्रशासन के अनुसार, यह वीडियो दुधवा के फलते-फूलते वन्यजीवों और उनके बीच होने वाले स्वाभाविक संघर्ष का बेहतरीन उदाहरण है।
वैसे जानवर हमसे ज़्यादा समझदार होते हैं। बाघ जानता है कि दो भालुओं से उलझना मतलब अपनी जान जोखिम में डालना। वो चुपचाप निकल गया, ई उसकी बुज़दिली नहीं, उसकी बुद्धिमानी है। पर असली मज़ा तो उन लखनऊ वाले मेहमानों को आया होगा, जिन्होंने टिकट तो बाघ का लिया था, पर बोनस में ‘भालू की बहादुरी’ भी देख ली। गाइड और ड्राइवर को भी शाबाशी मिलनी चाहिए, जिन्होंने शांति से ई नज़ारा दिखाया। दुधवा का जंगल रोज़ नई कहानी सुना रहा है, बस सुनने और समझने वाला चाहिए!











