‘युद्ध की खाई गहरी होने से पहले रुकें’: पोप लियो की अमेरिका-इजरायल और ईरान से भावुक अपील; बोले— “हथियारों से शांति नहीं आती”
वेटिकन से शांति की पुकार! पोप लियो ने ईरान-इजरायल युद्ध पर जताई 'गहरी चिंता'। बोले— "हथियारों से नहीं, संवाद से मिलेगी शांति।" हिंसा के दुष्चक्र को रोकने की मार्मिक अपील।

तरिकं खान
PNN24 News: मध्य पूर्व (Middle East) में भड़के भीषण महायुद्ध और मिसाइल हमलों के बीच ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो ने पूरी दुनिया से शांति की मार्मिक अपील की है। रविवार को सेंट पीटर्स स्क्वायर में एकत्रित हजारों तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए पोप ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष को “हिंसा का दुष्चक्र” करार दिया।

“मैं सभी संबंधित पक्षों से हार्दिक अपील करता हूं कि वे हिंसा के इस दुष्चक्र को रोकने की नैतिक जिम्मेदारी ग्रहण करें। हमें इसे रोकना होगा, इससे पहले कि यह एक ऐसी अपूरणीय खाई बन जाए जिसे कभी भरा न जा सके।”
धमकियों और हथियारों से नहीं बनेगा समाधान अपने साप्ताहिक भाषण के दौरान पोप ने आधुनिक युद्धनीति पर प्रहार करते हुए कहा कि स्थिरता और शांति कभी भी आपसी धमकियों या हथियारों के ढेर से नहीं बनाई जा सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया को इस संकट से निकलने के लिए “तर्कसंगत, वास्तविक और जिम्मेदार संवाद” की मेज पर लौटना ही होगा।
पीढ़ी दर पीढ़ी का नुकसान पोप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और खाड़ी देशों में स्कूलों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है। वेटिकन के सूत्रों के अनुसार, पोप इस युद्ध में हो रही मासूम बच्चों और आम नागरिकों की मौतों से व्यथित हैं और वे लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
PNN24 न्यूज़ का विश्लेषण: जहाँ एक तरफ ट्रंप ‘सत्ता परिवर्तन’ की बात कर रहे हैं और ईरान ‘प्रतिशोध’ की, वहीं पोप लियो की यह अपील एक नैतिक दबाव बनाने की कोशिश है। हालांकि, युद्ध जिस मोड़ पर पहुंच चुका है, वहां केवल ‘संवाद’ की बात कितनी प्रभावी होगी, यह एक बड़ा सवाल है।










