‘इफ्तार, हमला और इंसाफ का इंतज़ार’; ससवाड में रोज़ा खोल रहे युवकों को लोहे की रॉड से पीटा, 4 दिन बीते पर ‘खाकी’ के हाथ अब भी खाली

पुणे: ससवाड में इफ्तार कर रहे मुस्लिम युवकों पर 150 लोगों की भीड़ का हमला। 4 दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं। पीड़ितों का आरोप— "पुलिस ने पहचान के बावजूद आरोपियों को छोड़ा"। PNN24 की विशेष पड़ताल।

तारिक आज़मी

PNN24 News: महाराष्ट्र के पुणे (ग्रामीण) इलाके के ससवाड में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। रमजान के मुकद्दस महीने में बोपदेव घाट पर इफ्तार कर रहे मुस्लिम युवकों पर एक हिंसक भीड़ ने हमला कर दिया। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की फाइलों में आरोपी ‘अज्ञात’ हैं और सलाखें खाली पड़ी हैं।

1. क्या थी घटना? (13 मार्च की शाम)

13 मार्च को फिरोज़ जावेद सैयद अपने 14 दोस्तों के साथ झील किनारे रोज़ा इफ्तार के लिए बैठे थे। पीड़ितों के अनुसार, अचानक 150 से अधिक लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया।

  • बर्बरता: हमलावरों ने लोहे की रॉड और पत्थरों से हमला किया। अमीन नामक युवक के सिर पर 14 टांके आए हैं, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए।
  • नफरती नारे: पीड़ितों का आरोप है कि भीड़ चिल्ला रही थी— मुसलमान यहाँ नहीं बैठ सकते, क्या यह तुम्हारे बाप की संपत्ति है?” उनके कपड़े फाड़ दिए गए, टोपियां उतार दी गईं और पठानी कुर्ता न पहनने की धमकी दी गई।

2. पुलिस की ‘थ्योरी’ और ढुलमुल रवैया

ससवाड पुलिस ने बीएनएस (BNS) की गंभीर धाराओं और शस्त्र अधिनियम के तहत एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल ‘जांच’ का हवाला दिया जा रहा है।

  • CCTV का बहाना: पुलिस का दावा है कि घटनास्थल के कैमरे काम नहीं कर रहे थे।
  • हिरासत और रिहाई: पीड़ितों ने कुछ आरोपियों की पहचान कर तस्वीरें पुलिस को सौंपी थीं। पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन अगले दिन उन्हें छोड़ दिया गया। एसएचओ कुमार कदम का तर्क है कि फुटेज विश्लेषण में वे दोषी नहीं पाए गए।

3. “अज्ञात दबाव” का आरोप

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के प्रदेश अध्यक्ष अजहर तंबोली और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस स्टेशन के बाहर 1,000 ग्रामीणों की भीड़ जुटने के बाद पुलिस ने दबाव में आकर पकड़े गए आरोपियों को छोड़ दिया।

4. पलायन और नफरत की बढ़ती प्रवृत्ति

स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि पुणे के ग्रामीण इलाकों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की एक ‘व्यवस्थित प्रवृत्ति’ बन गई है।

  • गोबर खिलाने की घटना: हाल ही में एक मुस्लिम ट्रक चालक को कथित तौर पर गोबर खाने पर मजबूर करने का मामला भी सामने आया था।
  • पलायन: डर के माहौल के कारण क्षेत्र के कई मुस्लिम परिवार घर छोड़कर भागने को मजबूर हैं। आरोप है कि यहाँ नमाज़ पढ़ने और भूमि खरीदने पर भी अघोषित प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।

📊 घटनाक्रम: एक नज़र में (Incident Summary)

विवरण जानकारी
दिनांक/समय 13 मार्च 2026, शाम 6:30 बजे
स्थान बोपदेव घाट (झील किनारा), ससवाड, पुणे
पीड़ित अमीन शेख, साकिब, फरदीन और अन्य (कुल 15 दोस्त)
आरोप लोहे की रॉड से हमला, कपड़े फाड़ना, धार्मिक पहचान पर हमला
पुलिस कार्रवाई FIR दर्ज (अज्ञात के खिलाफ), गिरफ्तारी – शून्य

📌 PNN24 का कड़ा रुख:

लोकतंत्र में इबादत करने और सार्वजनिक स्थान पर बैठने का अधिकार सबको है। यदि भीड़ कानून को अपने हाथ में लेती है और पुलिस ‘दबाव’ या ‘अज्ञात’ के पीछे छिपती है, तो यह न्याय व्यवस्था की हार है। ससवाड पुलिस को उन 150 हमलावरों की पहचान कर मिसाल पेश करनी चाहिए, ताकि समाज में नफरत का यह ज़हर और न फैले।

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