‘बलिया में “सफेदपोश कातिलों” का तांडव: अवैध अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद बोर्ड हटाकर डॉक्टर फरार; प्रशासन की “जांच” पर उठे सवाल; सपा ने की 10 लाख मुआवजे और अधिकारियों के निलंबन की मांग!’
बलिया के करनी में 'मौत का अस्पताल'! अवैध निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत। संचालक डॉक्टर बोर्ड हटाकर फरार, उभांव पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा। जांच टीम और नोडल अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल। PNN24 की विशेष पड़ताल।

उमेश गुप्ता
बिल्थरारोड, बलिया (PNN24 News): जिले में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए अवैध निजी अस्पताल अब “कसाईघर” साबित हो रहे हैं। ताजा मामला उभांव थाना क्षेत्र के ग्राम करनी का है, जहां शुक्रवार की मध्य रात्रि एक कथित डॉक्टर की लापरवाही ने एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की जान ले ली। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा साक्ष्य मिटाने और बोर्ड हटाकर फरार होने की कोशिश ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल दी है।
1. ऑपरेशन के नाम पर “मौत का खेल”
मृतका पूनम के पति सोनू कुमार के अनुसार, प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ गंभीर स्थिति बताकर जल्दबाजी में ऑपरेशन किया गया। इस दौरान जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई।
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पुलिसिया कार्रवाई: उभांव पुलिस ने पति की तहरीर पर संबंधित महिला डॉक्टर के विरुद्ध बीएनएस (BNS) की धारा 105 के तहत नामजद मुकदमा दर्ज किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
2. जांच का ढोंग और नोडल टीम की विफलता
हैरानी की बात यह है कि 31 मार्च को ही एसडीएम और सीएचसी अधीक्षक द्वारा क्षेत्र के अस्पतालों की जांच की गई थी। इस “सघन जांच” के महज 10 दिन बाद ही यह दर्दनाक घटना घट गई। चर्चा है कि ये अस्पताल संचालक घटना के बाद सिर्फ नाम और बोर्ड बदलकर दोबारा मौत की दुकान खोल लेते हैं, और स्वास्थ्य विभाग की नोडल टीम केवल कागजी खानापूर्ति में व्यस्त रहती है।
3. राजनीतिक उबाल: अधिकारियों पर गिरे गाज
इस घटना को लेकर सियासी पारा भी चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के नेता अंगद यादव (महासचिव, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड) ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अधिकारियों को खुली छूट दे दी गई है। उन्होंने मांग की है कि:
- नोडल टीम की जिम्मेदारी तय कर तत्काल अधिकारियों को निलंबित किया जाए।
- पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
- शासन स्तर से उच्च स्तरीय जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक हो।











