‘युद्धविराम पर “भरोसे” की जंग: इसराइल ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठाए सवाल; राजदूत रूवेन अज़ार बोले— “हम पाकिस्तान को विश्वसनीय नहीं मानते”; क्या ट्रंप ने अपनी शर्तों पर थोपा है यह समझौता?’
कूटनीति या मजबूरी? इसराइली राजदूत रूवेन अज़ार ने पाकिस्तान की 'मध्यस्थ' भूमिका को नकारा, कहा— "भरोसेमंद नहीं है इस्लामाबाद"। ट्रंप के दबाव और तेल की कीमतों ने बनाया युद्धविराम का रास्ता, लेकिन लेबनान और परमाणु कार्यक्रम पर गहराया विवाद। क्या अमेरिका के साये में पाकिस्तान बना है इसराइल का 'अघोषित बॉडीगार्ड'? PNN24 की विशेष पड़ताल।

आफताब फारुकी
PNN24 News: मध्य-पूर्व में शांति की कोशिशों के बीच एक नया कूटनीतिक शीत युद्ध छिड़ गया है। भारत में इसराइल के राजदूत रूवेन अज़ार ने स्पष्ट कर दिया है कि इसराइल, पाकिस्तान को एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में स्वीकार नहीं करता। भले ही वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पाकिस्तान ने ‘बैक-चैनल’ के तौर पर काम किया हो, लेकिन यरूशलम के लिए इस्लामाबाद की नीयत और क्षमता दोनों ही संदेह के घेरे में हैं।
1. लेबनान: विवाद की मुख्य जड़
युद्धविराम की घोषणा के साथ ही सबसे बड़ा विरोधाभास लेबनान को लेकर सामने आया है:
- शहबाज़ शरीफ़ का दावा: पाकिस्तान ने कहा कि युद्धविराम लेबनान पर भी लागू होगा।
- इसराइल की दो-टूक: प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय ने साफ किया कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन जारी रहेगा। इसराइल इसे ईरान से अलग एक स्वतंत्र मोर्चा मानता है।
2. ट्रंप प्रशासन का ‘पाकिस्तानी’ कार्ड
‘फाइनैंशियल टाइम्स’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान की मज़बूती से चिंतित था।
- दबाव की राजनीति: ट्रंप ने 21 मार्च से ही पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को युद्धविराम के लिए राज़ी करने का दबाव बनाना शुरू किया था।
- आश्रित इसराइल: विपक्ष के नेता येर लापिड ने आरोप लगाया है कि नेतन्याहू ने इसराइल को अमेरिका पर इतना निर्भर बना दिया है कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा के निर्देश ‘फोन’ पर मिल रहे हैं।
3. परमाणु पाकिस्तान और सऊदी अरब का ‘बॉडीगार्ड’
विदेश मामलों की जानकार निरूपमा सुब्रमण्यम के अनुसार, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ डिफेंस पैक्ट असल में ईरान को संतुलित करने के लिए था।
-
अमेरिका की सहमति: सऊदी अरब को सुरक्षा के लिए एक ‘परमाणु बॉडीगार्ड’ चाहिए था और पाकिस्तान ने वह भूमिका निभाई। इसराइल भले ही सार्वजनिक रूप से विरोध करे, लेकिन पर्दे के पीछे अमेरिका के रहते पाकिस्तान इसराइल विरोधी नहीं हो सकता।
10 अप्रैल की इस्लामाबाद वार्ता यह तय करेगी कि क्या पाकिस्तान वास्तव में एक ‘विश्वसनीय मध्यस्थ’ बन सकता है या फिर यह केवल ट्रंप प्रशासन द्वारा बुना गया एक अस्थायी ‘पॉलिटिकल स्टंट’ है। PNN24 न्यूज़ इस ऐतिहासिक वार्ता पर बना रहेगा।
📊 युद्धविराम की 4 बड़ी चुनौतियां (Unresolved Issues)
| मुद्दा | इसराइल का रुख | ईरान/पाकिस्तान का रुख |
| लेबनान | सैन्य अभियान जारी रहेगा | युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा |
| परमाणु कार्यक्रम | संवर्धित यूरेनियम का भविष्य स्पष्ट हो | यह ईरान का संप्रभु अधिकार है |
| मिसाइल कार्यक्रम | अस्तित्व के लिए खतरा, बंद हो | सुरक्षा के लिए अनिवार्य है |
| रसद/अनुमति | होर्मुज़ को हथियार न बनाया जाए | होर्मुज़ पर ईरान का संप्रभु नियंत्रण है |









