‘अधिवक्ता हितों के लिए अखंड प्रताप सिंह का “चुनावी शंखनाद”: एमपी स्टेट बार काउंसिल के लिए जबलपुर हाई कोर्ट में दाखिल किया नामांकन; सैकड़ों समर्थकों का उमड़ा हुजूम; बोले— “हर वकील को मिले सम्मान और सुविधा!”‘

जबलपुर: मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद् चुनाव की सरगर्मी तेज़! वरिष्ठ अधिवक्ता अखंड प्रताप सिंह ने सैकड़ों समर्थकों के साथ दाखिल किया नामांकन। युवा अधिवक्ताओं के लिए स्टाइपेंड, चैंबर आवंटन और स्वास्थ्य बीमा को बनाया मुख्य चुनावी मुद्दा। रीवा कचहरी में सफल आंदोलन के बाद अब प्रदेश स्तर पर हुंकार। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

नावेद अहमद 

जबलपुर (PNN24 News): मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद् (State Bar Council) के आगामी निर्वाचन के लिए सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता अखंड प्रताप सिंह ने अपने सैकड़ों समर्थकों और सहयोगियों के साथ जबलपुर हाई कोर्ट पहुँचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके नामांकन के प्रस्तावक वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र मिश्र रहे। नामांकन के दौरान वकीलों का भारी उत्साह देखने को मिला, जो अखंड प्रताप सिंह के समर्थन में नारेबाजी करते नजर आए।

1. अधिवक्ता परिवार की सुरक्षा और सुविधा प्राथमिकता

नामांकन दाखिल करने के बाद PNN24 न्यूज़ से खास बातचीत में एडवोकेट अखंड प्रताप सिंह ने अपनी भावी योजनाओं का खाका खींचा। उन्होंने कहा, “अधिवक्ता समाज मेरा परिवार है और उनकी सुरक्षा व अधिकतम सुविधाएं दिलाना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य है। आज भी कई अदालतों में पीने का साफ पानी तक मयस्सर नहीं है। जीतने के बाद मेरा पहला काम हर परिसर में स्वच्छ जल और मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना होगा।”

2. युवा वकीलों के लिए स्टाइपेंड और स्वास्थ्य बीमा का मुद्दा

अखंड प्रताप सिंह ने अधिवक्ताओं की चिरलंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का संकेत दिया:

  • चैंबर आवंटन: उन्होंने शासन से मांग की कि जिन अधिवक्ताओं को अब तक चैंबर आवंटित नहीं हुए हैं, उन्हें जल्द से जल्द स्थान दिया जाए।
  • स्वास्थ्य बीमा: अधिवक्ताओं के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की मांग को वह और तेज करेंगे।
  • युवा अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड: संघर्षशील युवा वकीलों के लिए स्टाइपेंड की मांग को प्रमुखता से उठाने का संकल्प दोहराया।

3. रीवा आंदोलन से मिली नई पहचान

बताते चलें कि अखंड प्रताप सिंह की छवि एक जुझारू नेता के रूप में रही है। हाल ही में उन्होंने रीवा कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं की पार्किंग और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर ऐतिहासिक धरना दिया था। प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता के बाद जब उनकी मांगें मान ली गईं, तभी उन्होंने धरना समाप्त किया था। उनके इसी संघर्षशील स्वभाव के कारण अधिवक्ता समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जा रही है।

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