‘रामपुर में “समानांतर सरकार”: स्वार विधायक के बेटे ने CHC अधीक्षक की कुर्सी पर जमाया कब्ज़ा; सरकारी गनरों की सुरक्षा में “साहब” बनकर दिए निर्देश; क्या अब विधायक के परिजन चलाएंगे सरकारी दफ्तर?’

रामपुर: स्वार में 'छोटे सरकार' का जलवा! अपना दल (एस) विधायक शफीक अंसारी के बेटे उमेर अंसारी ने सीएचसी अधीक्षक की कुर्सी पर बैठकर अधिकारियों को हांका। सरकारी गनर और विधायक स्टीकर लगी कार में 'निरीक्षण' का वीडियो वायरल। क्या सत्ता के दबाव में नतमस्तक है रामपुर प्रशासन? PNN24 की विशेष पड़ताल।

हर्मेश भाटिया

स्वार, रामपुर (PNN24 News): लोकतंत्र में जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है, लेकिन रामपुर के स्वार विधानसभा क्षेत्र से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे संवैधानिक मर्यादाओं का मखौल उड़ाती नज़र आ रही हैं। अपना दल (एस) के विधायक शफीक अहमद अंसारी के बेटे मोहम्मद उमेर अंसारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है, जिसमें वे सत्ता के नशे में चूर होकर प्रशासनिक व्यवस्था को अपनी जेब में रखे हुए दिखाई दे रहे हैं।

1. अधीक्षक की कुर्सी और ‘हुक्मरान’ का अंदाज़

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि उमेर अंसारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के अधीक्षक की आधिकारिक कुर्सी पर विराजमान हैं।

  • निर्देशों की झड़ी: वे वहां मौजूद सरकारी अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को ऐसे दिशा-निर्देश दे रहे हैं मानो वे खुद कोई उच्च पदस्थ अधिकारी या निर्वाचित प्रतिनिधि हों।
  • मूकदर्शक प्रशासन: विडंबना यह है कि CHC अधीक्षक और पुलिस कर्मी उनके सामने नतमस्तक होकर निर्देशों का पालन करते दिख रहे हैं।

2. विधायक का स्टीकर, सरकार के गनर!

वीडियो में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। उमेर अंसारी न केवल सरकारी कार्यालयों पर कब्जा जमा रहे हैं, बल्कि:

  • सुरक्षा का दुरुपयोग: विधायक शफीक अंसारी को सरकार की ओर से जो पुलिस गनर सुरक्षा के लिए दिए गए हैं, वे विधायक के बजाय उनके बेटे की ‘परिक्रमा’ करते और उन्हें सैल्यूट ठोकते नज़र आ रहे हैं।
  • विधायक की गाड़ी: उमेर अंसारी ‘विधायक’ का स्टीकर लगी कार में ठाट-बाट से घूम रहे हैं, जो सीधे तौर पर विशेषाधिकारों का उल्लंघन है।

3. जनता के सवाल: क्या प्रशासन लाचार है?

स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सवाल यह है कि यदि हर जनप्रतिनिधि का बेटा इसी तरह सरकारी कुर्सियों पर बैठकर हुक्म चलाने लगेगा, तो सिस्टम और ‘गुंडागर्दी’ में क्या फर्क रह जाएगा? क्या रामपुर प्रशासन सत्ता के दबाव में इतना लाचार हो गया है कि एक गैर-संवैधानिक व्यक्ति को ‘साहब’ मानने पर मजबूर है?

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