‘ईरान युद्ध का “एंड-गेम” शुरू? ट्रंप ने किया सेना वापसी का इशारा; 21 दिनों में घर लौट सकते हैं अमेरिकी सैनिक, पर परमाणु और व्यापार पर फंसा पेंच!’
क्या खत्म होने वाली है महाजंग? राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 से 3 हफ्ते में ईरान से अमेरिकी सेना की वापसी के दिए संकेत। विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयानों ने युद्ध विराम की उम्मीदें जगाईं। नेतन्याहू बोले— "आधे से ज्यादा मिशन पूरा"। PNN24 की विशेष कूटनीतिक रिपोर्ट।

तारिक खान
PNN24 News: 28 फ़रवरी को शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँचता दिख रहा है। व्हाइट हाउस से आ रहे संकेतों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताज़ा बयानों ने संकेत दिया है कि अमेरिका इस युद्ध से जल्द बाहर निकलने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि, कूटनीति और जमीनी हकीकत के बीच अभी भी कई चुनौतियां बरकरार हैं।
1. ट्रंप का “3 हफ्ते” वाला टाइमलाइन
राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को बड़ा संकेत देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना अगले 2 से 3 हफ्तों में ईरान से बाहर निकल सकती है। ट्रंप के अनुसार:
- शर्त: ईरान को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह आने वाले कई वर्षों तक परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
- बातचीत: ट्रंप का दावा है कि एक “नए ईरानी शासन” के साथ गंभीर बातचीत चल रही है।
- होर्मुज़ स्ट्रेट: ट्रंप ने साफ किया है कि सैन्य अभियान तभी रुकेगा जब होर्मुज़ स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए तुरंत खोल दिया जाए।
2. मार्को रुबियो और कैरोलाइन लेविट का रुख
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ऑपरेशन अब “अगले कुछ हफ्तों” में खत्म हो सकता है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लेविट ने पहले ही संकेत दिया था कि यह सैन्य अभियान लगभग 6 हफ्तों तक चल सकता है, जो अब अपने अंतिम चरण (Final Stretch) में है।
3. इसराइल और रक्षा विभाग का आकलन
- बिन्यामिन नेतन्याहू: इसराइली प्रधानमंत्री ने कहा है कि सैन्य ऑपरेशन “आधे से ज्यादा” पूरा हो चुका है। उनका इशारा समय की ओर नहीं, बल्कि ईरानी सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लक्ष्यों की ओर था।
- पीट हेगसेथ (रक्षा मंत्री): हेगसेथ ने भी मिशन को तत्काल पूरा करने की जरूरत पर बल दिया है और कहा है कि कूटनीतिक बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
4. ईरान का इनकार और जमीनी हकीकत
एक तरफ अमेरिका बातचीत का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से साफ इनकार किया है। ईरान का कहना है कि वह अभी भी अपनी रक्षा में लगा हुआ है और अमेरिका केवल मध्यस्थों (जैसे पाकिस्तान) के जरिए प्रस्ताव भेज रहा है।









