‘बिल्थरारोड में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब: हिंदू-मुस्लिम बंधुओं ने मिलकर संपन्न कराया मोहर्रम; नगर पंचायत की लापरवाही पर फूटा अकीदतमंदों का गुस्सा’
बलिया ब्रेकिंग: बिल्थरारोड में गंगा-जमुनी तहजीब के साथ संपन्न हुआ 10वीं मोहर्रम का पर्व। हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने मिलकर अकीदत के साथ दफन किए ताजिये। अमरतानी गली और अजीम बाबू के मोहल्ले से उठे जुलूस, युवाओं ने दिखाए हैरतअंगेज करतब। नगर पंचायत की लापरवाही पर भड़के लोग, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था रही ध्वस्त। पढ़ें PNN24 की ग्राउंड रिपोर्ट।

उमेश गुप्ता
बिल्थरारोड/बलिया (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के बलिया जिले अंतर्गत बिल्थरारोड और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में दसवीं मोहर्रम का मातमी पर्व पूरी अकीदत, कड़े सुरक्षा घेरे और अद्वितीय सांप्रदायिक सौहार्द के बीच संपन्न हुआ। शुक्रवार की मध्य रात्रि तक कर्बला में पारंपरिक ताजियों के दफन के साथ ही 10 दिनों से चला आ रहा मोहर्रम का मुख्य गमगीन सिलसिला मुकम्मल हो गया। इस दौरान क्षेत्र में ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का वो नजारा देखने को मिला, जिसने समाज में एकता का एक बड़ा संदेश दिया है।
🚩 इमाम हुसैन की याद में उठे ताजिये और दुलदुल
यह पर्व हर साल पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उनके ७२ जानिसारों की करबला के मैदान में हुई ऐतिहासिक शहादत की याद में मनाया जाता है।
- सजे-धजे ताजिये: स्थानीय पुलिस और प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच बिल्थरारोड नगर के स्वर्गीय अजीम बाबू के मोहल्ले और अमरतानी गली से अलग-अलग भव्य ताजिये दफन के लिए उठाए गए। इन ताजियों को आधुनिक इलेक्ट्रिक उपकरणों और खूबसूरत रोशनी से सजाया गया था।
- दुलदुल और तासा-नगाड़े: जुलूस में शामिल ‘दुलदुल’ (हजरत इमाम हुसैन के घोड़े का प्रतीक) भी किसी ताजिये से कम आकर्षक नहीं लग रहा था। तासा और नगाड़ों की गूंज से पूरा बिल्थरारोड नगर गुंजायमान हो उठा।
- हैरतअंगेज खेल: ‘हुसैनिकया खेल कमेटी उमरगंज’ की अगुवाई में मुस्लिम युवाओं ने लाठी, तलवार और अन्य पारंपरिक हथियारों से कई खतरनाक और हैरतअंगेज खेल प्रदर्शित किए, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
🥤 हिंदू-मुस्लिम एकता कमेटी ने पेश की मिसाल, जगह-जगह लंगर
जुलूस के मार्ग में अकीदतमंदों और राहगीरों की सेवा के लिए दोनों समुदायों के लोग कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखे।
- एकता की स्टॉल: हिंदू-मुस्लिम एकता कमेटी के मोहम्मद शमशाद की ओर से शीतल पेयजल, खुरमा और पकौड़ों का व्यापक इंतजाम किया गया था।
- क्लबों की सेवा: ‘यूनाइटेड क्लब पूर्वी मोहाल’ की तरफ से खुरमा व शरबत का पुख्ता इंतजाम रहा। इसके अलावा अनवारुल, फैजान अहमद, सद्दाम शाह और इमरान ने चने का हलवा व पानी की शानदार व्यवस्था की।
- रामलीला मैदान में बड़ा कैंप: नगर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान के बीच सामूहिक रूप से शरबत, खुरमा, बिस्कुट और कोल्ड ड्रिंक्स आदि के स्टॉल लगाए गए थे, जिसका लाभ जुलूस में शामिल हजारों लोगों को मिला।
🔌 नगर पंचायत की बड़ी लापरवाही, अंधेरे में डूबी रहीं सड़कें
जुलूस के दौरान जहां एक तरफ जनता के बीच आपसी प्रेम दिखा, वहीं स्थानीय प्रशासन यानी नगर पंचायत की घोर लापरवाही भी उजागर हुई। ताज़िया जुलूस के मुख्य मार्गों पर सड़क के किनारे लगी सार्वजनिक प्रकाश (Street Lights) व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त देखने को मिली।
स्थानीय नागरिक आतिफ जमील के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध लोगों ने जिला प्रशासन और नगर पंचायत के साथ हुई ‘शांति समिति की बैठक’ में इस असुविधा को पहले ही उठाया था और लाइटिंग दुरुस्त रखने की मांग की थी। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह मांग बेअसर रही और जुलूस को अंधेरे रास्तों से गुजरना पड़ा, जिससे अकीदतमंदों में स्थानीय नगर निकाय के खिलाफ भारी आक्रोश देखा गया।
👥 इन समाजसेवियों और युवाओं की रही सक्रिय भूमिका
मोहर्रम के इस पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में दोनों समुदायों के जिम्मेदार लोग सक्रिय रहे। इसमें मुख्य रूप से अहमद अली, सालिम अंसारी, नैयर आजम, दानिस आफताब, मो. सद्दाम, यासीर तनबीर, नाजिम हुसैन, अजीमुल्लाह, एजाज अहमद, दरोगा, रिजवानुल्लाह उर्फ मुन्ना, सिब्बू भाई, नैयर अहमद, जकी अहमद, प्रशान्त कुमार मन्टू, अमित जायसवाल, सुनील कुमार टिंकू, दुर्गा प्रसाद मधुलाला, अंचल वर्मा, ओमजी सिंह, बजरंगी सोनी, किशन जायसवाल राजा, कमर मुख्तार, अलाउद्दीन शाह, भोला अशफाक, आतीफ जमील, शनि जायसवाल, मुख्तार अहमद, परवेज हमजा, अस्लम गुड्डू, संदीप जायसवाल और मन्टू मल्ल सहित भारी संख्या में लोग मुस्तैद रहे।












