‘ऑपरेशन सिंदूर का सबसे बड़ा यू-टर्न: सरकार ने माना— सीमा पार एक्शन में शहीद हुए थे 6 जांबाज; रक्षा मंत्री के बयान पर संसद से सोशल मीडिया तक छिड़ा सियासी संग्राम’
बड़ी खबर: 'ऑपरेशन सिंदूर' के 6 जांबाज बलिदानियों के नामों को सरकार ने पहली बार किया सार्वजनिक; राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित हुए नाम। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुराने बयान को लेकर कांग्रेस, आप और आरजेडी ने सरकार को घेरा; संसद को गुमराह करने का आरोप। रक्षा मंत्रालय और पीआईबी (PIB) ने आरोपों को किया खारिज। पढ़ें PNN24 की विशेष रक्षा रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
नई दिल्ली (PNN24 News): पिछले साल मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद करने के लिए चलाए गए भारतीय सशस्त्र बलों के गुप्त और आक्रामक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर एक बहुत बड़ा आधिकारिक खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि इस सैन्य अभियान के दौरान देश के छह वीर सपूतों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। इन सभी छह जांबाजों के नाम अब नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) की ‘वॉल 3D’ पर साल 2025 के खंड में ‘रोल ऑफ ऑनर’ के तहत स्वर्णिम अक्षरों में अंकित कर दिए गए हैं।

🎖️ देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले ६ वीरों की आधिकारिक सूची
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की वेबसाइट पर प्रकाशित आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बहु-सेवा और संयुक्त सैन्य ऑपरेशन में थलसेना और वायुसेना दोनों के निम्नलिखित वीरों ने शहादत का जाम पिया था:
- सूबेदार मेजर पवन कुमार — मुख्यालय 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड
- राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र) — 4 जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
- लांस नायक दिनेश कुमार — 5 फील्ड रेजिमेंट
- एविएशन टेक्निशियन मूड मुरलीनायक — 851 लाइट रेजिमेंट
- हवलदार सुनील कुमार सिंह — 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी
- सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना पदक) — 39 विंग, भारतीय वायुसेना
इन नामों में राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीरता के प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘वीर चक्र’ और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को ‘वायु सेना पदक’ से सम्मानित किया जाना यह साफ करता है कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय जांबाजों ने अदम्य साहस का परिचय दिया था।
🚀 पहलगाम आतंकी हमले के प्रतिशोध में हुआ था ‘ऑपरेशन सिंदूर’
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक कायराना आतंकी हमला हुआ था, जिसमें अधिकांश पर्यटकों समेत २६ निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इस बर्बरता का कड़ा प्रतिशोध लेने के लिए भारतीय सेना और वायुसेना ने ७ मई २०२५ की तड़के संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत की। इस बेहद गुप्त और सटीक ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने सीमा पार पाकिस्तान और पीओके (PoK) में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के 9 मुख्य आतंकी ठिकानों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया था। इस चार दिवसीय भीषण संघर्ष के बाद, 10 मई 2025 को दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों (DGMO) की उच्च स्तरीय बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति बनी थी।
🛑 विपक्ष का तीखा हमला: “संसद और देश को गुमराह किया गया”
युद्ध स्मारक पर नामों के चस्पा होते ही समूचा विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के 28 जुलाई 2025 को लोकसभा में दिए उस बयान का वीडियो साझा कर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, जिसमें उन्होंने जोर देकर विपक्ष से कहा था— “इस ऑपरेशन में क्या हमारे जांबाज सैनिकों को कोई क्षति पहुंची है, तो उसका उत्तर है नहीं।”
- कांग्रेस का वार: कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा, “सिर्फ दो ही संभावनाएं हैं। या तो रक्षा मंत्री को अपने ही मंत्रालय के तथ्यों की जानकारी नहीं थी, जो उनकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, या फिर उन्हें सच्चाई मालूम थी और इसके बावजूद उन्होंने संसद को गुमराह किया। पूरे एक साल तक बीजेपी सरकार ने इन वीरों की शहादत को देश से छिपाए रखा।” वहीं यूपी कांग्रेस के नेता दीपक सिंह ने इसे देश के लोकतंत्र और सर्वोच्च सदन का अपमान बताया।
- आम आदमी पार्टी (AAP) का रुख: ‘आप’ ने अपने आधिकारिक हैंडल पर लिखा कि बीजेपी सरकार जवानों की शहादत पर जनता को गुमराह कर रही है। वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने अमेरिकी हस्तक्षेप का मुद्दा उठाते हुए कहा, “हम ऑपरेशन सिंदूर को देख रहे थे, सेना करारा जवाब दे रही थी। तभी अचानक हमारे अपने देश के नेता की घोषणा से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दे दिया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान का युद्ध रुकवाया है। ये लोग देश की सुरक्षा पर झूठ बोलते हैं।”
- आरजेडी (RJD) का हमला: आरजेडी की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. कंचन यादव ने तंज कसते हुए कहा कि संसद में मेजें थपथपाकर कहा गया था कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन आज 6 शहीदों की सूची सबके सामने है।
🛡️ सरकार और रक्षा मंत्रालय की सफाई: “बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया”
चौतरफा घिरने के बाद रक्षा मंत्रालय और प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेक टीम ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
- रक्षा मंत्रालय का पक्ष: रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि 28 जुलाई 2025 को संसद में दिए गए रक्षा मंत्री के भाषण को राजनीति के तहत गलत संदर्भ में दिखाया जा रहा है।
- शहादत छिपाने की बात गलत: सरकार के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई सैन्य क्षति को कभी भी छिपाया नहीं गया। ऑपरेशन के तुरंत बाद मई 2025 में हुई तत्कालीन डीजीएमओ (DGMO) की प्रेस ब्रीफिंग में खुद सेना ने इन जांबाजों को आधिकारिक श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
- वीरता पुरस्कारों की घोषणा: इसके बाद अगस्त 2025 में ही इन सभी शहीदों के लिए ‘वीर चक्र’ और ‘वायु सेना पदक’ जैसे वीरता पुरस्कारों की भी आधिकारिक घोषणा सार्वजनिक रूप से कर दी गई थी। सरकार का तर्क है कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की प्रक्रिया के तहत नामों को क्रमानुसार उकेरने में तय वक्त लगता है, जिसे अब मुकम्मल कर दिया गया है।










