सत्य निकेतन इमारत हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; 10 सितंबर को होगी सुनवाई, देश भर के PG और हॉस्टलों के ‘सेफ्टी ऑडिट’ की मांग’
सत्य निकेतन इमारत हादसे में 7 मौतों के बाद सुप्रीम कोर्ट 10 सितंबर को सुनवाई करेगा। एमिकस क्यूरी अजीत कुमार सिन्हा ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर पीजी/हॉस्टलों के सेफ्टी ऑडिट की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की याचिका अपने पास ट्रांसफर करने के संकेत दिए हैं। पढ़िए PNN24 की लीगल रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
नई दिल्ली (PNN24 News): दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला बॉयज पीजी इमारत ढहने से हुए दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की मौत का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट इस गंभीर मामले पर 10 सितंबर (शुक्रवार) को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है।

🏛️ एमिकस क्यूरी ने उठाई जल्द सुनवाई और सेफ्टी ऑडिट की मांग
मामले में अदालत के न्याय मित्र (Amicus Curiae) और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट से इस विषय पर तत्काल ध्यान देने का अनुरोध किया था। ‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के अनुसार:
- 6 सितंबर की घटना का संदर्भ: एमिकस क्यूरी ने शीर्ष अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर 6 सितंबर को सत्य निकेतन में हुए 5 मंजिला पीजी ढहने के भीषण हादसे का प्रमुखता से उल्लेख किया।
- बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन: रिपोर्ट में उजागर किया गया कि देश भर में आवासीय परिसरों को बिना कानूनी अनुमति के व्यावसायिक पीजी और हॉस्टलों में बदला जा रहा है।
- अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट: सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि दिल्ली के कॉलेजों व विश्वविद्यालयों (जैसे DU) के आसपास संचालित सभी निजी हॉस्टलों, पीजी और कोचिंग सेंटरों की इमारतों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण और ‘स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट’ कराने का निर्देश जारी किया जाए।
⚖️ दिल्ली हाईकोर्ट की PIL सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है ट्रांसफर
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि इस हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में पहले से ही एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई चल रही है और हाईकोर्ट कई कड़े आदेश भी जारी कर चुका है।
इस पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट में लंबित याचिका के मुद्दे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन मामले से काफी हद तक मेल खाते हैं। पीठ ने संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही इस जनहित याचिका को अपने पास स्थानांतरित (Transfer) कर सकता है ताकि पूरे मामले और सुरक्षा दिशानिर्देशों पर एक साथ राष्ट्रीय स्तर पर निर्णय लिया जा सके।











