जिन कामगारों ने देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वही अपनी पुख्ता पहचान और सही मेहनताना नही पा रहे है – डॉ मोहम्मद आरिफ

ए जावेद

वारणसी. वाराणसी में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर, जैसे- निर्माण श्रमिक, घरों में काम करने वाली महिलाये, कूड़ा बीनने वाले, रेड़ी पटरी दुकानदार, रिक्शा चालक, नाविक (नाव चलाने वाले), दाहसंस्कार करने वाले मजदूर इत्यादि के रूप में कार्यरत हैंI असंगठित क्षेत्र में सबसे बड़ा कामगार वर्ग निर्माण श्रमिकों का है जिनके द्वारा दिन रात पसीना बहा कर सभी के लिये सुरक्षित आशियाना बनाने व विविध बुनियादी ढांचे निर्मित करने का काम करता हैI बावजूद इसके इन निर्माण मजदूरों को आज तक न ही इनकी पुख्ता पहचान मिल पाई और न ही इनको सम्मान जनक मेहनताना मिल सका, ऐसे में इन कामगारों का देश की अर्थ व्यवस्था में किया जाने वाला योगदान बेहद महत्वपूर्ण हैI

उक्त बातें असंगठित कामगार अधिकार मंच के डा0 मोहम्मद आरिफ ने एम ट्रस्ट व वाराणसी समुदाय विकास समिति के द्वारा असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे निर्माण मजदूरों, घरेलू कामगार महिलाओं, की स्थिति व श्रमिक कानून के अंतर्गत उनके अधिकारों के मुद्दों पर आयोजित एक कार्यशाला में कहीI

अमित कुमार (समन्वयक एम ट्रस्ट) ने कहा की आई.जी.एस.एस.एस. दिल्ली के सहयोग से  समावेशी शहर परियोजना के अंतर्गत वाराणसी में शहरी गरीबों के मूलभूत अधिकारों को दिलाने व उनके पहचान के लिए समुदाय आधारित संगठन बना कर कार्य किया जा रहा हैI इसी क्रम में उन्होंने कहा की सरकार द्वारा कुछ योजनाओं का संचालन जून माह से किया जा रहा है जैसे – दिव्यांग पुनर्वास योजना, दुकान निर्माण, गुमटी और ठेला खरीदने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी इसमें 10000/ धनराशी लाभार्थी को सरकार द्वारा दिया जाएगा इस योजना के अंतर्गत हम अपने कार्यक्षेत्र में ऐसे पात्र लोगों को ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलवाया जायेगा I इसी प्रकार सरैया/ नक्खिघाट/ पुरानापुल का क्षेत्र प्रति वर्ष बाढ़ से प्रभावित होता है इसके लिए संगठन द्वारा आपदा प्रबंधन विभाग वाराणसी से यह मांग किया जायेगा की बाढ़ से पहले बचाव हेतु लोगों को ट्रेनिंग दिलवाना तथा पानी की स्वच्छता हेतु क्लोरिन का वितरण कराया जायI

इसी क्रम में उन्होंने कहा की जो घाटों पर लाश जलाने वाले मजदूर है उन्हें आग से बचाव के लिए कोई सुविधा मुहैया नहीं करायी जाती जिससे उनको लाश जलाते वक्त स्वयं की झुलसने का खतरा बना रहता है इसके लिए संगठन के द्वारा मांग कराया जायेगा की उन्हें फायर प्रूफ जैकेट, गलप्स, इत्यादि मुहैया कराया जाय I नाविकों को पानी में डूबने से बचाव के लिए जीवन रक्षक जैकेट मुहैया कराया जाय I

पत्रकार प्रेम प्रकाश ने घरेलू कामगार महिलाओं की वर्त्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश की जनसँख्या की आधा हिस्सा महिलाएं है और संवैधानिक रूप से उनका भी सामान अधिकार हैI सभी कार्यों में महिलाओं की बराबर भागीदारी के बावजूद समाज में उनके साथ बचपन से ही भेदभाव किया जाता हैI वाराणसी में ही हजारों की संख्या में ऐसी घरेलू महिला कामगार होंगी जो अपने नियोक्ता द्वारा तरह तरह से क्रूरता, अत्याचार, और शोषण सह रही होंगीI ये हिंसा चहारदीवारी के भीतर होने से पता भी नहीं चलता है जब तक की कोई बड़ी और भयानक घटना न हो जायेI यदि घर में काम करने वाली किसी महिला के साथ नियोक्ता द्वारा हिंसा किया जाता है तो केवल पुलिस में शिकायत के अलावा ऐसा कोई फोरम नहीं है जहाँ जाकर वो अपनी बात रख सके और शिकायत कर सकेI पीड़िता अपनी आवाज को इस लिये नहीं उठा पाती कि उसे अपनी रोज़ी रोटी छिन जाने का डर रहता है, चूंकि घर खर्च की जिम्मेदारी, बच्चों की परवरिश व अन्य किसी कारण से अपने साथ हुई घटना को उजागर नहीं करती I

श्रीमती शीलम झा (प्रबंधक सर्व सेवा संघ वाराणसी ने) घरेलू कामगार महिलाओं की सभी समस्याओं के निवारण हेतु उनके संगठन का निर्माण करना ज़रूरी है और सरकार से यह मांग किया जाना ज़रूरी है की महिला कामगारों के अधिकार/ सामाजिक सुरक्षा/ न्यूनतम वेतन/ छुट्टी को सुनिश्चित करने के साथ ही इनके लिये अलग से कानून व बोर्ड का गठन किया जायI

अमेठी से आये सामाजिक कार्यकर्ता दीपचन्द्र कश्यप ने कार्यशाला में निर्माण श्रमिक व घरेलू कामगारों के श्रमिक रजिस्ट्रेशन व केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में उपस्थित महिला कामगारों, निर्माण श्रमिकों के साथ विस्तार पूर्वक चर्चा किये व लोगों को उनके अधिकारों व योजनाओं के प्रति जागरूक किये, बुनकर समुदाय के लोगों को हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग में रजिस्ट्रेशन की पक्रिया व योजनाओं के बारे में बताया गया I कार्यशाला में एम ट्रस्ट से अमित कुमार, शमा परवीन, आशीष सिंह, उपस्थित रहेI इसी के साथ सरैयाँ, किलाकोहना, रहमतपुरा, मोमिनपुरा, खिरकिया घाट, कोनिया, कज्जाक्पुरा, भट्ठा, तुलसीकुवां, नक्खी घाट से समुदाय के निर्माण श्रमिक, घरेलूकामगार, बुनकर, नाविक, का काम काम करने वाले लोग उपस्थित रहेI

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