ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स ईरान की यात्रा करने के लिए बेताब, फ़िलिस्तीनियों की हालत देखकर कहा, दिल टूट गया

नीलोफर बानो

ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स ने एक इंटरव्यू के दौरान ईरान की यात्रा करने की इच्छा ज़ाहिर की है। पिछले हफ़्ते स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इक़ॉनॉमिक फ़ोरम के इतर संडे टाइम्स के साथ बातचीत में प्रिंस चार्ल्स ने कहा, हां, मैं ईरान की यात्रा करना चाहता हूं।

स्विट्ज़रलैंड के बाद चार्ल्स ने अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी इलाक़ों का दौरा किया। शुक्रवार को वे बेतलेहम पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़ित फ़िलिस्तीनियों की ख़राब हालत देखकर कहाः यह देखकर मेरा दिल टूट गया। ईरान के बारे में पूछे जाने पर ब्रिटेन में सिंहासन के वारिस ने कहाः मैं जानता हूं कि कई शताब्दियों से ईरान, विश्व का एक महत्वपूर्ण भाग रहा है, जिसका मानव ज्ञान, संस्कृति, शायरी और कला में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है।


उन्होंने आगे कहाः वास्तव में ईरानी उल्लेखनीय लोग हैं, और मैं लंबे समय से इस्लामी संस्कृति, वास्तुकला और शिल्प कौशल का दीवाना रहा हूं।

ग़ौरतलब है कि ईरान विरोधी अमरीका की साम्राज्यवादी नीतियों का अनुसरण करने के कारण, पिछले कई वर्षों से तेहरान और लंदन के बीच रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं। इसी महीने की शुरूआत में ब्रिटेन को तेहरान में अपने राजदूत रॉब मेकायर को सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को भड़काने और प्रदर्शन में भाग लेने के लिए ईरान की नाराज़गी का सामना करना पड़ा था।

संडे टाइम्स के साथ इंटरव्यू में फ़िलिस्तीनियों और इस्राईल के बीच शांति के बारे में पूछे जाने पर प्रिंस चार्ल्स ने कहा, “उन्हें इसकी आशा है, इंशाल्लाह।” शुक्रवार को चार्ल्स ने फ़िलिस्तीनी शहर बेतलेहम का दौरा किया और फ़िलिस्तीनियों पर ज़ायोनी शासन के अत्याचारों पर गहरा खेद जताते हुए कहाः यह सब देखकर मेरा दिल टूट गया है।


ब्रिटेन के स्काई न्यूज़ टीवी चैनल के मुताबिक़, फ़िलिस्तीनियों के लिए ब्रिटिश राज घराने के किसी सदस्य का अब तक का यह सबसे मज़बूत समर्थन है। ग़ौरतलब है कि ब्रितानी साम्राज्य को फ़िलिस्तीनियों की समस्त कठिनाईयों के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है। इसलिए कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने ही जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों से यहूदियों को फ़िलिस्तीन में लाकर बसाने का प्रस्ताव दिया था।

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