हाजरा हॉस्पिटल में परिजनों का हंगामा, जाने क्या है डॉ आरिफ अंसारी के खिलाफ चल रही पोस्ट में हकीकत और क्या है फ़साना

ए जावेद

वाराणसी। वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र के हनुमान फाटक क्षेत्र स्थित हाजरा हॉस्पिटल में कल शाम हंगामे की स्थिति खडी हो गई थी। कुछ सियासत के जानकारों के साथ एक बच्ची के परिजनों द्वारा हंगामा किया जा रहा था। हंगामे की सुचना पाकर मौके पर थाना प्रभारी आदमपुर सहित क्षेत्रीय चौकी इंचार्ज भी पहुचे और हंगामे को शांत करवाया। इसके बाद देर रात से सोशल मीडिया पर हाज़रा हॉस्पिटल और उसके चिकित्सक डॉ आरिफ अंसारी के विरोध में सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने लगी।

घटना कुछ इस प्रकार है कि एक मासूम बच्ची के बाये पैर में गैन्ग्रिंग की शिकायत थी। बच्ची के पिता जेयाऊल हसन का आरोप था कि दिनांक 10 तारिख को बच्ची बुनकर अस्पताल में पैदा हुई। जिसकी तबियत ख़राब होने के कारण यहाँ लाकर एडमिट करवाया गया था। इस दौरान बच्ची का एक पैर काला पड़ गया है। साथ ही डाक्टर ने कही और रिफर कर दिया है। अब बच्ची का इलाज करने को कोई तैयार नही है। परिजनों का आरोप था कि उनको किसी अज्ञात चिकित्सक ने बताया है कि बच्ची के पैर के हड्डी में सुई लगा दिया गया है जिसके कारण बच्ची की ये स्थिति हुई है।

क्या कहते है चिकित्सक

मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े होने के वजह से किसी चिकित्सक ने हमसे खुल के बात नही किया। मगर जब कुछ चिकित्सको से इस आरोप के सम्बन्ध में बात किया गया तो उन्होंने कहा कि ये संभव नही है कि किसी की हड्डी में इंजेक्शन लग जाए। ऐसा अगर किसी ने परिजनों को बताया है तो यह गलत है और संभव नही है। बकिया बच्ची को गैन्ग्रिग कैसे हुई इस सम्बन्ध में इलाज कर रहे डाक्टर ही बता सकते है।

क्या बोले डॉ आरिफ अंसारी

इन आरोपों के बाद हमारी बातचीत बाल रोग विशेषज्ञ डॉ आरिफ अंसारी से हुई। उन्होंने हमसे बात करते हुवे बताया कि बच्ची का जन्म बुनकर अस्पताल में दिनांक 8 अक्टूबर को हुआ था। इसके बाद परिजनों ने उसका दो दिनों तक इलाज क्षेत्र के एक अन्य बाल रोग विशेषज्ञ डॉ जुनैद के यहाँ करवाया। बच्ची को डॉ जुनैद ने 10 अक्टूबर को रिफर कर दिया। तब परिजन हमारे पास लेकर आये। बच्ची को पैर में इन्फेक्शन की समस्या थी। समस्याओं को देखते हुवे बच्ची को विशेष चिकित्सा कक्षा एनएसयुआई में एडमिट किया गया।

डॉ आरिफ अंसारी ने कहा कि बच्ची को एडमिट करने के पहले ही परिजनों को उसकी स्थिति के सम्बन्ध में बता दिया गया था। साफ़ साफ़ बच्चे के बारे में बता कर इस सम्बन्ध में उनकी सहमती पत्र भी लिया गया जो आज भी अस्पताल के रिकार्ड में उपलब्ध है। प्रयास पूरा किया गया मगर सफलता नही हासिल हुई। बच्ची की गैग्रिग की समस्या बढती जा रही थी। इस क्रम में दिनाक 18 अक्टूबर को दोपहर बाद हमने बच्ची को बीएचयु के लिए रिफर कर दिया। परिजनों को सभी स्थिति के सम्बन्ध में बता दिया गया था। परिजनों ने खुद की गरीबी का हवाला दिया था तो इन 8 दिनों में दवा इलाज से लेकर हर एक किस्म की प्रदान सुविधा सहित केवल 10 हज़ार रुपया बिल बच्ची के परिजनों ने दिया। जबकि दवा इलाज का खर्च कही इससे ज्यादा था। मगर लॉक डाउन और परिजनों के द्वारा खुद की गरीबी का हवाला देख कर मैंने कुछ नहीं कहा।

डॉ आरिफ अंसारी ने बताया कि इसके बाद बच्ची को लेकर कल रात को वो लोग अस्पताल आकर हंगामा करने लगे और ज़बरदस्ती मुझसे इलाज करवाने की जिद्द करने लगे। जबकि बच्ची की गैन्ग्रिग की समस्या के कारण इसका इन्फेक्शन अन्य बच्चो को हो जाने की संभावना भी बड़ी बलवती है। फिर आखिर कई जानो को कैसे खतरे में डाला जा सकता है। कुछ सियासी लोगो ने इसमें सियासत की रोटी भी सेकने का प्रयास किया था। आखिर पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप करके मामला रफादफा करवाया।

क्या कहते है परिजन

हमने इस सम्बन्ध में परिजनों से बात करने की कोशिश किया। मगर परिजन अपने हंगामे में व्यस्त थे। इस दरमियान परिवार के ही एक सदस्य ने हमसे बताया कि डॉ जुनैद ने दो दिन इलाज किया था। बच्ची के पैर में कुछ दिक्कत थी। दो दिनों में डॉ जुनैद ने कुल 18 हज़ार की बिल भी लिया था। उसके बाद उन्होंने यहाँ भेज दिया और यहाँ ये स्थिति है। हम बच्ची को लेकर कहा जाए। कोई इलाज करने को तैयार नही है। हमारे पास पैसे भी नही है। हमारी मांग है कि यही डॉ आरिफ इलाज करे। हम इसके अलावा कुछ नही जानते है।

क्या कहते है डॉ जुनैद

हमने इस प्रकरण में डॉ जुनैद से बात करने की कोशिश किया तो हमारा उनसे संपर्क नही हो पाया। उनको फोन करने पर फोन भी नही उठा। बताते चले कि डॉ जुनैद इसके पूर्व भी चर्चा का केंद्र रह चुके है।

बहरहाल, पुलिस के समझाने पर परिजन बच्ची को लेकर बीएचयु के लिए चले गए थे। परिजनों का आरोप एक तरफ है तो वही चिकित्सक का बयान उसके ठीक विपरीत है। चिकित्सक डॉ आरिफ अंसारी की इस बात में भी दम दिखाई दे रहा है कि आखिर जब एक सप्ताह मैंने इलाज किया और परिजन मेरे इलाज से संतुष्ट नही थे तो उन्हें पहले ही रिफर करवा लेना चाहिए थे। रही बात दवा इलाज की तो जितनी संभव कोशिश थी मैने किया। अब उसके मुद्दा बना कर हंगामा करना एक अलग सी बात है।

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