शफीक को आज़ादी तो मिली पर रहने को अब घर नहीं: बलात्कार के जिस मामले में मध्य प्रदेश के पूर्व पार्षद शफीक अंसारी के घर चला था बुल्डोज़र, अदालत ने उस मामले में किया बाइज्ज़त बरी

तारिक खान

डेस्क: मध्य प्रदेश में चले बुल्डोज़र इंसाफ को अदालत ने उस वक्त गलत साबित कर दिया जब एक मुस्लिम पार्षद जिस पर बलात्कार के आरोप लगने के बाद बुल्डोज़र से मकान तोड़ दिया गया था, को अदालत ने उक्त कथित रेप के मामले में बाइज्ज़त बरी कर दिया है। अब पूर्व पार्षद शफीक अंसारी बरी तो हो गए है। मगर एक बड़ी समस्या उनके साथ ये है कि सर छिपाने के लिए आशियाना तो सरकार के बुल्डोज़र ने तोड़ दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब बुल्डोज़र इन्साफ पर बड़ा सवाल उठ रहा है।

राजगढ़ ज़िले के फ़र्स्ट एडिशनल सेशन जज चित्रेन्द्र सिंह सोलंकी मामले की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने 14 फ़रवरी, 2025 को शफीक अंसारी को मामले में बरी कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिला और उसके पति की गवाही में काफ़ी फ़र्क है। उन्होंने ये भी कहा कि आरोपी शफीक अंसारी के घर पर पीड़िता की मौजूदगी ही संदिग्ध है। कोर्ट का ये भी कहना था कि विक्टिम के साथ आरोपी के यौन संबंध बनाने का दावा, मेडिकल या वैज्ञानिक सबूतों से पुष्ट नहीं होता। विक्टिम ने घटना के बारे में अपने पति को देरी से बताने या रिपोर्ट दर्ज करने में देरी के लिए कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया है।

बताते चले कि कथित रेप की घटना और शिकायत दर्ज कराने के बीच 1 महीने का अंतर था। हालांकि, महिला का दावा था कि उसने अपने बेटे की शादी के कारण घटना के बारे में किसी को नहीं बताया। गांव में पुलिस स्टेशन होने के बावजूद, महिला ने अपने बेटे की शादी के तुरंत बाद घटना की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। बेटे की शादी के 15 दिन बाद तक भी उसने अपने पति और बेटों को घटना की जानकारी नहीं दी। लेकिन उसने इसका कोई कारण नहीं बताया। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, कोर्ट ने माना कि आरोपी शफीक एक वार्ड पार्षद थे। वहीं, नगरपालिका ने शफीक और इलाक़े के निवासियों की शिकायत पर महिला का घर ध्वस्त कर दिया। इससे पता चलता है कि विक्टिम ने अपने घर को गिराए जाने के कारण शफीक अंसारी के ख़िलाफ़ रेप की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

ऐसे में ‘आरोपी शफीक ने विक्टिम को ग़लत तरीक़े से रोका, उसके साथ रेप किया या डराने के इरादे से उसे जान से मारने की धमकी दी’, ये सारे आरोप साबित ही नहीं होते। मध्य प्रदेश के राजगढ़ ज़िले में पूर्व पार्षद शफीक अंसारी को रेप के आरोप से बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने महिला के आरोपों को झूठा पाया। कोर्ट ने ये भी पाया कि महिला ने आरोप इसलिए लगाए, क्योंकि शफीक अंसारी ने महिला के ख़िलाफ़ एक शिकायत की थी। इसी शिकायत के आधार पर महिला का घर तोड़ दिया गया था। बाद में रेप की शिकायत के बाद शफीक अंसारी का घर भी तोड़ दिया गया था। अब उन्होंने कहा है कि वो अपने ध्वस्त घर के लिए मुआवजे की मांग करेंगे। इसके लिए वो उचित मंच का दरवाजा खटखटाएंगे।

आरोपों से बरी होने के बाद शफीक अंसारी की मामले में प्रतिक्रिया आई। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को उन्होंने बताया, मैं जल्द ही घर तोड़े जाने के ख़िलाफ़ अपील दायर करने जा रहा हूं। जमानत पर बाहर आने के बाद मुझे अपने भाई के घर पर रहना पड़ा। अब मैं अपने पैतृक घर में शिफ्ट हो गया हूं। इस मामले की वजह से मेरे पूरे परिवार को नुकसान उठाना पड़ा। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, मैंने अपनी मेहनत की कमाई से 4,000 वर्ग फ़ीट ज़मीन पर घर बनाया था। लेकिन अब वहां सिर्फ़ मलबा है।

उन्होंने कहा कि हम अपने भाई के घर में रह रहे हैं। हमारे पास सभी कागजात थे। आरोप लगाया गया था कि घर बिना अनुमति के बनाया गया था। लेकिन हमें रिकॉर्ड दिखाने या कुछ भी कहने का मौक़ा नहीं दिया गया। इसे बस तोड़ दिया गया। मेरा सात लोगों का परिवार है। उन सभी को मुश्किल हुई। मैं तीन महीने के लिए जेल गया था। भोपाल से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित है सारंगपुर नगर नगरपालिका। शफीक अंसारी तब यहीं के पार्षद थे। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि महिला के घर में मादक पदार्थों का अवैध व्यापार किया जा रहा था। इसी को लेकर शफीक ने भी अधिकारियों से शिकायत की थी। शिकायत के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने महिला के घर को अतिक्रमण के कारण ध्वस्त कर दिया।

इसके कुछ दिनों बाद महिला ने तत्कालीन पार्षद शफीक अंसारी पर रेप का आरोप लगाया। महिला ने दावा किया कि शफीक ने 4 फरवरी, 2021 को उसे अपने घर बुलाया, उसके बेटे की शादी में मदद करने के बहाने। लेकिन इसके बाद उसके साथ ‘रेप’ किया। 4 मार्च, 2021 को महिला ने इसे लेकर शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के 10 दिन के अंदर, यानी 13 मार्च, 2021 को अंसारी का घर गिरा दिया गया। शफीक अंसारी ने बताया, अधिकारी सुबह 7 बजे आए। वो बुलडोजर लेकर पहुंचे थे। इससे पहले कि मेरे परिवार वाले कुछ समझ पाते, मेरा घर बर्बाद हो चुका था। मैं उस समय फरार था। मैंने अगले दिन आत्मसमर्पण कर दिया। बाद में शफीक अंसारी को शरण देने के आरोप में उनके बेटे और भाई पर भी मामला दर्ज किया गया था।

अब शफीक अंसारी ने बरी होने के बाद ये भी कहा, मुझे इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि मैंने अपने इलाक़े में अवैध ड्रग तस्करी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। महिला ने बदला लेने के लिए मेरे ख़िलाफ़ झूठी शिकायत दर्ज कराई। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि शफीक अंसारी अब निर्दोष साबित हो चुके हैं। लेकिन अब उनके पास अपना घर नहीं है। ऐसे में अब वो अपने घर को गिराए जाने के लिए न्याय की मांग करते हुए, कोर्ट जाने की योजना बना रहे हैं।

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