वाराणसी नाइट मार्केट बंद होने से दुकानदारों में हाहाकार, शैलेन्द्र सिंह ने लगाया पीएम मोदी से हस्तक्षेप की गुहार

सबा अंसारी

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थापित नाइट मार्केट को बंद करने के प्रशासनिक निर्णय ने छोटे व्यापारियों के बीच भारी चिंता और आक्रोश उत्पन्न कर दिया है। इस निर्णय के खिलाफ पूर्व उपाध्यक्ष, छावनी परिषद, वाराणसी, शैलेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

शैलेन्द्र सिंह ने अपने पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से यह नाइट मार्केट शुरू किया गया था, जिससे सैकड़ों गरीब एवं मध्यमवर्गीय दुकानदारों को रोजगार मिला। इस बाजार में कई छोटे व्यापारियों ने अपने व्यवसाय को स्थापित किया, जिनमें उनके पुत्र आदर्श सिंह भी शामिल थे। उन्होंने ‘चाय सियासत’ नामक ठेले से शुरुआत कर आगे चलकर दुकान स्थापित की थी।

व्यापारियों के लिए बड़ा झटका शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने नाइट मार्केट को बंद करने का फैसला लिया और इसके संचालनकर्ता कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया। इस फैसले के चलते वहाँ के सभी दुकानदारों को बाजार छोड़ने का आदेश दिया गया, जिससे वे बेरोजगारी के कगार पर आ गए हैं।

उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि यदि संचालक कंपनी ने किसी प्रकार की अनियमितता की है, तो उसके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन निर्दोष और मेहनतकश दुकानदारों को उनके रोजगार से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। प्रधानमंत्री से तीन प्रमुख मांगें शैलेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. स्थानीय प्रशासन को इस निर्णय पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए जाएं।
  2. यदि कंपनी की गलती के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है, तो दुकानदारों को किसी वैकल्पिक योजना के तहत राहत दी जाए।
  3. नाइट मार्केट को पुनः व्यवस्थित रूप से संचालित करने का प्रभावी समाधान निकाला जाए, जिससे छोटे व्यापारियों की जीविका प्रभावित न हो।
  4. छोटे व्यापारियों के लिए जीवन-मरण का सवाल वाराणसी के नाइट मार्केट में काम करने वाले कई छोटे दुकानदारों का कहना है कि यह बाजार उनके लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन था। यहाँ हर दिन हजारों ग्राहक आते थे, जिससे उनके परिवारों का भरण-पोषण होता था। लेकिन प्रशासन के अचानक लिए गए फैसले ने उनकी आर्थिक स्थिति को गहरे संकट में डाल दिया है।

अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या वाराणसी के छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी या नहीं।

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