कोलकाता के करीब एक गाँव में 130 दलित परिवारों ने लगाया आरोप कि उन्हें स्थानीय शिव मंदिर में नहीं जाने दिया जाता है

तारिक खान
डेस्क: एक तरफ जहाँ सियासत दलित और पिछडो को लेकर सियासत में बड़े बड़े बयानबाजी कर रही है। वही दुसरे तरफ कोलकाता के पास एक गाँव ऐसा भी है जिसमे 130 दलित परिवारों को स्थानीय शिव मंदिर में जाने नहीं दिए जाने का बड़ा आरोप लगा है। पीड़ित परिवारों ने बताया कि हर साल मंदिर में होने वाली पूजा के लिए वे लोग चंदा देते हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्हें मंदिर में घुसने नहीं दिया जाता।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे विवाद के केंद्र में गिधाग्राम गांव के दासपारा इलाके में बना एक शिव मंदिर है। जो लगभग 200 साल पुराना माना जाता है। मंदिर पर लगी पट्टिका पर लिखा है कि 1997 में इसका जीर्णोद्धार किया गया था। गिधाग्राम ग्राम पंचायत के उपप्रधान पुलक चंद्र कोनार ने अखबार को बताया, लोग कहते हैं कि स्थानीय जमींदारों ने करीब 200 साल पहले इस मंदिर की स्थापना की थी। बाद में इसे चलाने के लिए एक समिति बनाई गई। दासपारा के लोग अनुसूचित जाति के हैं। उन्हें मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है। वे पूजा करना चाहते हैं, दूसरे लोग उन्हें अनुमति नहीं देते।
रिपोर्ट के मुताबिक, 24 फरवरी को शिवरात्रि से पहले, दासपारा के निवासियों ने खंड विकास अधिकारी, उप-विभागीय अधिकारी और पुलिस को एक लेटर लिखा। ताकि उन्हें मंदिर में पूजा करने की परमिशन मिले। लेकिन फिर भी शिवरात्रि के दिन उन्हें मंदिर में नहीं घुसने दिया गया। इसके बाद 28 फरवरी को एसडीओ ने गांव के निवासियों, मंदिर समिति के सदस्यों, विधायक, बीडीओ और पुलिस के साथ एक मीटिंग बुलाई थी। जिसमें एक प्रस्ताव पारित किया गया और कहा गया, हमारे संविधान के जरिए जातिगत भेदभाव पर रोक लगाई गई है। सभी को पूजा करने का अधिकार है। इसलिए दास परिवारों को गिधग्राम के गिधवार शिव मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।











