जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद: उपराष्ट्रपति चुनाव की सरगर्मियां तेज, चुनाव आयोग की क्या है तैयारी?

आदिल अहमद

PNN24 News, नई दिल्ली: देश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक ही खबर की चर्चा है – उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा! अचानक आए इस बड़े घटनाक्रम ने न केवल सत्ता के समीकरणों को हिला दिया है, बल्कि अब सबकी निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि आखिर अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा और इस पूरी प्रक्रिया को चुनाव आयोग कैसे संभालेगा।

जैसे ही उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हुआ, देश का संवैधानिक ढांचा सक्रिय हो गया है। संविधान के अनुच्छेद 68 (1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए चुनाव यथाशीघ्र कराया जाना चाहिए। और यहीं पर देश की सबसे बड़ी चुनावी संस्था, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

चुनाव आयोग की तैयारियां: समयबद्ध प्रक्रिया की चुनौती

सूत्रों के मुताबिक, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के तुरंत बाद से ही चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। यह एक बेहद संवेदनशील और समयबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें कोई देरी नहीं की जा सकती।

  1. अधिसूचना जारी करना: सबसे पहले, चुनाव आयोग को औपचारिक रूप से उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी करनी होगी। इसमें चुनाव की तारीखें, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि, नामांकन पत्रों की जांच और उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होगी।
  2. नामांकन प्रक्रिया: उम्मीदवारों को एक निश्चित संख्या में प्रस्तावकों और अनुमोदकों के साथ नामांकन पत्र दाखिल करना होता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि उम्मीदवार सभी संवैधानिक मानदंडों को पूरा करते हों।
  3. मतदान और मतगणना: उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होता है। इसमें मनोनीत सदस्य भी मतदान करते हैं। चुनाव आयोग को मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना होता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?

उपराष्ट्रपति का पद सिर्फ एक संवैधानिक पद नहीं है, बल्कि यह राज्यसभा का सभापति भी होता है। राज्यसभा में विधेयकों पर चर्चा, बहस और उनके पारित होने में उपराष्ट्रपति की भूमिका केंद्रीय होती है। ऐसे में, यह चुनाव न केवल राजनीतिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि देश की विधायी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए भी इसका खासा महत्व है।

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगा। खासकर ऐसे समय में जब अगले आम चुनावों में ज्यादा वक्त नहीं बचा है, इस चुनाव का परिणाम भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने में भी सहायक हो सकता है।

फिलहाल, राजनीतिक दलों के भीतर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन शुरू हो गया है। कौन होगा अगला उपराष्ट्रपति? इस सवाल का जवाब देने से पहले, हमें चुनाव आयोग द्वारा जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा। लेकिन एक बात तो तय है, आने वाले दिन देश की राजनीति के लिए बेहद रोमांचक होने वाले हैं!

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