मुंबई सीरियल ब्लास्ट – बॉम्बे हाई कोर्ट के सभी 12 अभियुक्तों को बरी किए जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ महाराष्ट्र सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

आफताब फारुकी
मुंबई, महाराष्ट्र: मुंबई में 12 मार्च 1993 को हुए सीरियल बम धमाकों की दर्दनाक यादें आज भी लोगों के जेहन में ताज़ा हैं। वो काला दिन, जब एक के बाद एक हुए धमाकों ने मुंबई को दहला दिया था और सैकड़ों बेगुनाहों की जान ले ली थी। इस मामले में न्याय की लंबी लड़ाई जारी है, और अब एक नया मोड़ आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सभी 12 अभियुक्तों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले से महाराष्ट्र सरकार सहमत नहीं है। सरकार का मानना है कि इन अभियुक्तों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद थे और इन्हें बरी किया जाना सही नहीं है। सरकार का तर्क है कि ऐसे गंभीर मामले में, जहां सैकड़ों लोगों की जान गई हो, न्याय सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है। इसलिए, राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है।
इस फैसले के बाद से पीड़ितों और उनके परिवारों में एक बार फिर उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर होने से उन्हें लगता है कि शायद अब उन्हें सही मायने में न्याय मिल पाएगा। 1993 के धमाकों में अपने करीबियों को खोने वाले लोग इतने सालों बाद भी न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका दर्द आज भी उतना ही ताजा है, और वे चाहते हैं कि गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाए।
अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा और बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का पुनरीक्षण करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र सरकार की अपील पर क्या फैसला सुनाता है। यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उन पीड़ितों की उम्मीदों से भी जुड़ा है जो इतने सालों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
मुंबई सीरियल ब्लास्ट का मामला भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक मील का पत्थर है। महाराष्ट्र सरकार का यह कदम इस बात को दर्शाता है कि राज्य सरकार इस भयानक घटना के दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। पूरा देश सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगा, उम्मीद है कि न्याय की जीत होगी।











