बिहार के एसआईआर को लेकर एनडीए सांसद गिरधारी यादव ने बताया इसको चुनाव आयोग का ‘तुगलकी फरमान’

तारिक खान

डेस्क: बिहार में चुनाव आयोग के एसआईआर को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. विपक्षी पार्टियों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मगर अब यह एनडीए के लिए भी अब सरदर्द बनता दिखाई दे रहा है. विपक्षी सांसदों और विधायको के बाद अब एनडीए के सांसद और विधायक ने भी विरोध करना शुरू हो गया है. जदयू सांसद गिरधारी यादव ने एसआईआर को चुनाव आयोग का ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया है. वहीं जदयू विधायक संजीव कुमार ने भी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं.

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए गिरधारी यादव ने कहा, चुनाव आयोग को कोई व्यवहारिक ज्ञान नहीं है. वो बिहार का ना इतिहास जानता है न भूगोल. बरसात के दिन में जब खेती का काम चल रहा है. लोगों को डॉक्यूमेंट ढूंढने में लगा दिया गया है. हमें कागजात का इंतजाम करने में 10 दिन लग गए. हमारा बेटा अमेरिका में रहता है वह कैसे सिग्नेचर करेगा. एसआईआर हम पर जबरदस्ती थोप दिया गया है. करना था तो 6 महीने का वक्त दिया जाना चाहिए था. यह चुनाव आयोग का तुगलकी फरमान है.

जब गिरधारी यादव से पूछा गया कि उनकी पार्टी जदयू तो इस प्रक्रिया का समर्थन कर रही तो उन्होंने जवाब दिया कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है. गिरधारी यादव ने कहा कि ये उनका व्यक्तिगत विचार है. और सच्चाई यही है. अगर वो सच्चाई भी नहीं बोल पाएंगे तो फिर सांसद क्यों बने हैं. गिरधारी यादव के अलावा परबत्ता विधानसभा से जदयू विधायक संजीव कुमार ने भी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, जो मजदूर बिहार से बाहर हैं, वे दस्तावेज अपलोड नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए उनका नाम छूट जा रहा है. चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि मतदाता सूची में उन मजदूरों के नाम न छूटें जो बाहर काम कर रहे हैं.

संजीव कुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनके क्षेत्र में कोई भी घुसपैठिया नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि बाहर काम करने वाले मजदूरों से कनेक्ट करने में परेशानी आ रही है. इतने कम समय में सब कैसे अपडेट होगा. वो सब (बाहर रहने वाले) एनडीए के वोटर हैं. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए. गिरधारी यादव बिहार के बांका लोकसभा क्षेत्र से जनता दल युनाइटेड के सांसद हैं. गिरधारी यादव का राजनीतिक सफर जनता दल से शुरू हुआ था. बाद में फिर वो राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए. फिर साल 2010 में उन्होंने आरजेडी छोड़कर जदयू का दामन थाम लिया. गिरधारी यादव 4 बार लोकसभा और 4 बार विधानसभा के लिए चुने गए हैं.

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *