बिहार के एसआईआर को लेकर एनडीए सांसद गिरधारी यादव ने बताया इसको चुनाव आयोग का ‘तुगलकी फरमान’

तारिक खान
डेस्क: बिहार में चुनाव आयोग के एसआईआर को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. विपक्षी पार्टियों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मगर अब यह एनडीए के लिए भी अब सरदर्द बनता दिखाई दे रहा है. विपक्षी सांसदों और विधायको के बाद अब एनडीए के सांसद और विधायक ने भी विरोध करना शुरू हो गया है. जदयू सांसद गिरधारी यादव ने एसआईआर को चुनाव आयोग का ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया है. वहीं जदयू विधायक संजीव कुमार ने भी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं.

SIR पर JDU सांसद गिरधारी यादव के बाद JDU विधायक डॉ संजीव भी पार्टी के ख़िलाफ़ जा कर विपक्ष की बातों में सहमति दिखा रहे हैं इनलोगों का कहना है SIR ग़लत है #BiharElections2025 pic.twitter.com/P8VMrvHs7q
— Mukesh singh (@Mukesh_Journo) July 23, 2025
जब गिरधारी यादव से पूछा गया कि उनकी पार्टी जदयू तो इस प्रक्रिया का समर्थन कर रही तो उन्होंने जवाब दिया कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है. गिरधारी यादव ने कहा कि ये उनका व्यक्तिगत विचार है. और सच्चाई यही है. अगर वो सच्चाई भी नहीं बोल पाएंगे तो फिर सांसद क्यों बने हैं. गिरधारी यादव के अलावा परबत्ता विधानसभा से जदयू विधायक संजीव कुमार ने भी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, जो मजदूर बिहार से बाहर हैं, वे दस्तावेज अपलोड नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए उनका नाम छूट जा रहा है. चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि मतदाता सूची में उन मजदूरों के नाम न छूटें जो बाहर काम कर रहे हैं.
संजीव कुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनके क्षेत्र में कोई भी घुसपैठिया नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि बाहर काम करने वाले मजदूरों से कनेक्ट करने में परेशानी आ रही है. इतने कम समय में सब कैसे अपडेट होगा. वो सब (बाहर रहने वाले) एनडीए के वोटर हैं. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए. गिरधारी यादव बिहार के बांका लोकसभा क्षेत्र से जनता दल युनाइटेड के सांसद हैं. गिरधारी यादव का राजनीतिक सफर जनता दल से शुरू हुआ था. बाद में फिर वो राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए. फिर साल 2010 में उन्होंने आरजेडी छोड़कर जदयू का दामन थाम लिया. गिरधारी यादव 4 बार लोकसभा और 4 बार विधानसभा के लिए चुने गए हैं.











