मध्य प्रदेश में दलित अत्याचार की हद! 15 दिनों में तीसरा मामला, युवक को ज़बरदस्ती पेशाब पिलाने का शर्मनाक आरोप

तारिक खान

भिंड/कटनी: मध्य प्रदेश एक बार फिर दलित उत्पीड़न की शर्मनाक घटनाओं से सुर्खियों में है। पिछले महज़ 15 दिनों के भीतर दलित समाज के खिलाफ अत्याचार की यह तीसरी बड़ी खबर है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। ताजा मामला भिंड जिले से सामने आया है, जहां एक दलित युवक के अपहरण, मारपीट और ज़बरदस्ती पेशाब पिलाने का घिनौना आरोप लगा है।

क्या है भिंड का नया ‘पेशाब कांड’?

ख़बरों के अनुसार, भिंड जिले में एक 25 वर्षीय दलित ड्राइवर को उसके पूर्व मालिकों और उनके साथियों ने ग्वालियर से अगवा कर लिया। आरोप है कि अपहरण के बाद उसे भिंड के सुरपुरा गाँव लाया गया, जहां उसे लोहे की जंजीरों से बांधा गया। अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए, आरोपियों ने न सिर्फ़ उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, बल्कि उसे जबरन पेशाब पीने के लिए भी मजबूर किया।

  1. पीड़ित: ज्ञान सिंह जाटव (नाम बदला हुआ)।
  2. आरोप: पूर्व मालिक के लिए गाड़ी चलाने से मना करने पर अपहरण और बर्बरता।
  3. पुलिस कार्रवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों (सोनू बरुआ, आलोक शर्मा और छोटू ओझा) को गिरफ्तार कर लिया है। SC/ST अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

कटनी और सीधी की पुरानी पीड़ा

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य पहले से ही इसी तरह के दो हालिया मामलों से सकते में है:

  1. कटनी में पेशाब कांड: इससे महज़ कुछ दिन पहले, कटनी जिले के बहोरीबंद इलाके में अवैध खनन का विरोध करने पर दलित युवक राजकुमार चौधरी के साथ मारपीट की गई और उसके मुँह पर पेशाब करने का शर्मनाक आरोप लगा। पुलिस ने इस मामले में भी शिकायत दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
  2. सीधी की भयावह यादें: यह सब सीधी जिले के आदिवासी युवक पर पेशाब करने की उस भयानक घटना की याद दिलाता है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

सवाल ‘कानून के राज’ पर

लगातार हो रही इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश में दलितों और आदिवासियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दलित संगठन और विपक्षी दल सरकार पर कठोर कार्रवाई करने में ढिलाई बरतने का आरोप लगा रहे हैं। एक तरफ सरकार दलित उत्थान की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ 15 दिनों के अंतराल में इस तरह की तीसरी घटना दर्शाती है कि समाज में जातीय दंभ और अत्याचार का नंगा नाच बेखौफ जारी है।

राज्य के मुख्यमंत्री ने इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि सिर्फ़ रिपोर्ट मंगाना काफी नहीं है। ऐसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए कठोरतम दण्ड और समाज में कड़ा संदेश देना ज़रूरी है। इन घटनाओं पर नियंत्रण पाने में सरकार की असफलता पर विपक्ष हमलावर है, और यह चुनावी साल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है।

दलितों को पेशाब पिलाया-चटाया, टॉर्चर की हद पार, MP में अपराधियों का हिसाब कब? SC/ST Act यह वीडियो मध्य प्रदेश में दलितों के खिलाफ हाल ही में हुई बर्बरता और अत्याचार के मामलों पर प्रकाश डालता है, जिसमें पेशाब पिलाने और चटाने जैसी घटनाएं शामिल हैं।

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