क्या वोटर लिस्ट से नाम कटेगा? बंगाल में ‘SIR’ पर सियासी रस्साकशी के बीच क्यों डरे हुए हैं आम लोग

आफताब फारुकी
कोलकाता, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में इन दिनों SIR (Special Intensive Revision) शब्द ने एक अजीब खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। यह सिर्फ मतदाता सूची (Voter List) का पुनरीक्षण है, लेकिन राजनीतिक दलों की तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना दिया है, जिससे आम आदमी, खासकर सीमांत और मतुआ समुदाय के लोग, गहरे डर में हैं।
सियासी घमासान क्यों?
SIR को लेकर राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने हैं।
- TMC का विरोध: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी SIR को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। TMC का आरोप है कि यह प्रक्रिया CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) को लागू करने की दिशा में पहला कदम है। उन्हें डर है कि इस पुनरीक्षण के बहाने लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे, खासकर मतुआ समुदाय और अन्य गरीब तथा हाशिए पर रहने वाले लोगों के, जिनके पास पुराने और पुख्ता दस्तावेज़ नहीं हैं।
- BJP का रुख: BJP का कहना है कि यह केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसे चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया जा रहा है। वे आरोप लगाते हैं कि TMC अवैध मतदाताओं को बचाने के लिए लोगों को भड़का रही है।
आम लोग क्यों हैं डरे हुए?
इस राजनीतिक लड़ाई में सबसे ज्यादा पिस रहा है आम आदमी। लोगों में यह असुरक्षा की भावना घर कर गई है कि अगर उनके पास 2002 की मतदाता सूची से नाम मिलान या अनिवार्य दस्तावेज नहीं हुए, तो उनका क्या होगा।
- दस्तावेजों का डर: SIR के तहत कुछ स्थानों पर 2002 की वोटर लिस्ट से नाम का मिलान किया जा रहा है। कई लोग जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र या पुराने ज़मीनी दस्तावेज़ नहीं हैं, वे दहशत में हैं। वे सरकारी दफ्तरों के बाहर लंबी-लंबी कतारों में खड़े हैं, अपने दस्तावेज़ों को ‘ठीक’ करवाने की कोशिश कर रहे हैं।
- आत्महत्या का प्रयास: कूचबिहार जैसे इलाकों से यह दिल दहलाने वाली खबर भी आई है कि SIR में नाम कटने के डर से एक 60 वर्षीय किसान ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि डर का माहौल कितना गहरा है।
- नागरिकता का खतरा: लोगों को डर है कि वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब सिर्फ मताधिकार खोना नहीं है, बल्कि उन्हें देश से बाहर निकाल दिए जाने का डर सता रहा है।
PNN24 News की अपील है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक दल संयम रखें और चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी योग्य नागरिक का नाम सिर्फ दस्तावेज़ों की कमी के कारण वोटर लिस्ट से न कटे। लोगों को डरने के बजाय सही जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।










