हिमाचल का वो स्कूल, जहाँ ‘ज्ञान’ नहीं, ‘भेदभाव’ सिखाया गया: दलित बच्चे के उत्पीड़न पर 3 शिक्षकों पर FIR

तारिक खान
शिमला, हिमाचल प्रदेश: देवभूमि हिमाचल से शर्मसार कर देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा के मंदिर को कलंकित कर दिया है। एक सरकारी स्कूल में, जहाँ बच्चों को नैतिकता और समानता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहीं दलित समुदाय के एक आठ साल के मासूम बच्चे को अमानवीय उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है।
हेडमास्टर समेत तीन शिक्षकों पर गंभीर आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, शिमला के एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर समेत तीन शिक्षकों पर बच्चे के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगे हैं। बच्चे के पिता की शिकायत पर पुलिस ने अब इन तीनों शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला? बच्चे के पिता ने आरोप लगाया है कि स्कूल के शिक्षकों ने उनके बेटे को न सिर्फ पीटा, बल्कि ‘बिच्छूबूटी’ (nettle plant) उसकी पैंट में डाल दी, जिससे मासूम को असहनीय दर्द और जलन हुई। यह हरकत न केवल शारीरिक रूप से क्रूर थी, बल्कि जातिगत द्वेष की भावना से भी प्रेरित थी, जहाँ कथित तौर पर दलित और नेपाली छात्रों को राजपूत छात्रों से अलग बैठाया जाता था।
‘गुरु’ ही बन गए ज़ालिम
यह घटना सोचने पर मजबूर करती है कि जब बच्चे के ‘गुरु’ ही उसके साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे, तो वह कहाँ सुरक्षित महसूस करेगा? स्कूल वो जगह है जहाँ हर बच्चे को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। इस तरह का भेदभाव और उत्पीड़न न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि हमारे समाज के माथे पर एक गहरा दाग है।
कड़ी कार्रवाई की मांग और जांच शुरू
पुलिस ने पीड़ित बच्चे के पिता की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं, जिनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं, के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शिक्षा विभाग ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनकी मांग है कि आरोपी शिक्षकों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी शिक्षक ऐसी घिनौनी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।










