ज़ेलेंस्की की दुविधा: अमेरिका की शर्त पर यूक्रेन को ‘गरिमा या साझेदार’ में से एक चुनना होगा…!

आदिल अहमद

डेस्क: यूक्रेन और रूस के बीच जारी विनाशकारी युद्ध को लेकर एक बड़ा मोड़ आ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने साफ कहा है कि अगर वह रूस के साथ युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका द्वारा रखी गई शर्तों को मानते हैं, तो उन्हें अपने सबसे बड़े और सबसे अहम साझेदार, अमेरिका का समर्थन खोना पड़ सकता है।

इतिहास का सबसे मुश्किल इम्तिहान

शुक्रवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ज़ेलेंस्की काफी भावुक और दृढ़ नज़र आए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को इस वक्त “एक बहुत मुश्किल चुनाव” करना पड़ सकता है। उन्होंने अपनी दुविधा को कुछ यूं बयां किया:

“या तो हमें अपनी गरिमा खोनी होगी या अपने सबसे अहम साझेदार (अमेरिका) का साथ छोड़ना होगा।”

उन्होंने इस पल को “हमारे इतिहास की सबसे कठिन घड़ियों में से एक” बताया।

लीक हुई अमेरिकी ‘शांति योजना’ और यूक्रेन की ‘नकार’

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की यह तीखी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिका की तथाकथित ‘शांति योजना’ का फ़्रेमवर्क’ मीडिया में लीक हो गया है। इस फ़्रेमवर्क में वे ही शर्तें रखी गई हैं, जिन्हें यूक्रेन पहले ही स्पष्ट रूप से खारिज कर चुका है।

इस 28 बिंदुओं वाले पीस फ़्रेमवर्क में यूक्रेन पर निम्नलिखित शर्तें मानने का दबाव है:

  • यूक्रेन के पूर्वी दोनेत्स्क क्षेत्र से अपनी सेना को पीछे हटाना।
  • अपने सैनिकों की संख्या में कमी करना।
  • सबसे महत्वपूर्ण, भविष्य में नेटो (NATO) में कभी शामिल न होने की लिखित गारंटी देना।

ज़मीन पर कब्जा और आत्म-समर्पण का दबाव

गौरतलब है कि रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूरी तरह से आक्रमण कर दिया था। इस आक्रमण के चलते रूस ने यूक्रेन के लगभग 20 फ़ीसदी इलाके पर फिलहाल कब्जा कर रखा है। ऐसी स्थिति में, ज़ेलेंस्की के लिए अमेरिकी शर्तों को मानना किसी आत्म-समर्पण से कम नहीं होगा। इन शर्तों को मानने का मतलब होगा, ना केवल अपने इलाके को गंवाना, बल्कि भविष्य की सुरक्षा गारंटी को भी दांव पर लगाना।

वहीं, यदि वह इन शर्तों को नहीं मानते हैं, तो उन्हें युद्ध में सबसे बड़ी मदद देने वाले अमेरिका का सहयोग खोने का बड़ा जोखिम उठाना पड़ेगा। यह देखना होगा कि यूक्रेन इस ऐतिहासिक दुविधा से कैसे निकलता है। दुनिया की नज़रें अब अमेरिका और यूक्रेन दोनों के अगले कदम पर टिकी हैं।

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