‘नफरत’ को नकार, ‘उम्मीद’ को चुना: कौन हैं ज़ोहरान मामदानी, जो ट्रंप के वार को झेलकर बने न्यूयॉर्क के मेयर?

तारिक आज़मी

PNN24 न्यूज़ डेस्क: अमेरिका के सबसे बड़े और विविधता भरे शहर न्यूयॉर्क सिटी से एक ऐसी खबर आई है, जिसने दुनिया भर में सकारात्मक बदलाव की एक लहर पैदा कर दी है। भारतीय मूल के और अपने बेबाक, प्रगतिशील विचारों के लिए मशहूर ज़ोहरान मामदानी ने मेयर का चुनाव जीतकर न केवल इतिहास रचा है, बल्कि उन्होंने उस नफरती राजनीति को करारा जवाब दिया है, जिसका नेतृत्व सीधे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे थे।

ट्रंप का ‘वार’ और मामदानी का जवाब

यह चुनाव सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच का मुकाबला नहीं था, बल्कि यह पुरानी और नई विचारधारा के बीच का संघर्ष था। मामदानी को हराने के लिए ट्रंप ने खुलेआम अभियान चलाया था।

  • ट्रंप का सीधा खतरा: ट्रंप ने ज़ोहरान को कम्युनिस्ट उम्मीदवार कहा और खुलेआम धमकी दी कि अगर मामदानी जीतते हैं, तो वह न्यूयॉर्क शहर के लिए फ़ेडरल फ़ंड (Federal Funding) सीमित कर देंगे।
  • लोकतंत्र की जीत: इस धमकी और नफरती बयानबाजी के बावजूद, 34 वर्षीय मामदानी ने शानदार जीत हासिल की। उन्होंने अपनी जीत के बाद ट्रंप को सीधा संदेश दिया, “डोनाल्ड ट्रंप, चूँकि मैं जानता हूँ कि आप देख रहे हैं, मेरे पास आपके लिए चार शब्द हैं: टर्न द वॉल्यूम अप (आवाज ऊँची कर लीजिए)।
  • एकजुटता का संदेश: उन्होंने आगे कहा, “हममें से किसी तक पहुँचने के लिए, आपको हम सब से गुज़रना पड़ेगा।” यह बयान दिखाता है कि यह जीत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि प्रवासी, मज़दूर, और हाशिये पर पड़े हर उस इंसान की है जिसे ट्रंप की राजनीति ने निशाना बनाया था।

कौन हैं ज़ोहरान मामदानी?

ज़ोहरान मामदानी का जीवन खुद ही प्रवासी संघर्ष और सफलता की कहानी है:

  • भारत और अफ्रीका से नाता: उनका जन्म 1991 में युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था। उनकी माँ, मीरा नायर, प्रसिद्ध भारतीय फ़िल्मकार हैं (जिन्होंने ‘मॉनसून वेडिंग’ और ‘सलाम बॉम्बे’ जैसी फ़िल्में बनाई)। ज़ोहरान अपनी पहचान भारतीय-अमेरिकी मुस्लिम के तौर पर बताते हैं।
  • देर से नागरिकता: वह 7 साल की उम्र में न्यूयॉर्क आ गए थे, लेकिन 2018 में ही अमेरिकी नागरिक बन पाए। यह बात उनकी राजनीति को और अधिक मानवीय बनाती है, क्योंकि वह खुद प्रवासी जीवन के संघर्षों से गुज़रे हैं।
  • राजनीतिक विचारधारा: वह खुद को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट कहते हैं। उनका मानना है कि सरकार का काम आम आदमी को राहत देना होना चाहिए, न कि केवल अमीरों को फायदा पहुँचाना।

आम आदमी के मुद्दों की जीत

मामदानी की जीत का आधार उनकी सकारात्मक और ज़मीनी राजनीति थी। उन्होंने लोगों से भावनात्मक जुड़ाव स्थापित किया और सीधे उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को उठाया:

  • किराया नियंत्रण: उन्होंने वादा किया है कि वह किरायेदारों के लिए किराए को स्थायी रूप से स्थिर करेंगे।
  • मुफ्त बस सेवा: उन्होंने बसों में मुफ्त यात्रा देने का वादा किया है ताकि गरीब और कामकाजी लोग आसानी से आ-जा सकें।
  • अमीरों पर टैक्स: उन्होंने साफ कहा है कि वह शहर के करोड़पतियों से टैक्स लेंगे, ताकि आम लोगों की सेवा की जा सके।

ज़ोहरान मामदानी की यह जीत सिर्फ न्यूयॉर्क के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक संदेश है कि नफरत और धमकी की राजनीति के सामने उम्मीद, एकजुटता और न्याय की आवाज़ हमेशा ऊंची रहेगी।

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