तमिलनाडु में ‘एंटी सनातन धर्म की सरकार’….! कार्तिगई दीपम पर महादीपम को लेकर हंगामे के बीच बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में DMK सरकार को कहा ‘एंटी सनातन धर्म’ सरकार

शफी उस्मानी
PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को ज़ीरो आवर के दौरान बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने तमिलनाडु की डीएमके (DMK) सरकार पर ‘एंटी सनातन धर्म‘ होने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने मदुरै के तिरुपरनकुंड्रम में हुए कार्तिगई दीपम विवाद का ज़िक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अदालत के आदेश के बावजूद श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर बढ़ने से रोका और उन पर लाठीचार्ज किया। इस बयान पर सदन में डीएमके सांसदों ने कड़ा विरोध जताया।
क्या है तिरुपरनकुंड्रम दीपम विवाद?
यह विवाद मदुरै ज़िले के तिरुपरनकुंड्रम में स्थित सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर और उससे सटी पहाड़ी की चोटी पर दीप जलाने की परंपरा को लेकर है।
- पारंपरिक प्रथा: हर साल कार्तिगई दीपम के दिन सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के पिल्लैयार मंदिर दीपम मंडपम में दीप प्रज्वलित करने की प्रथा है।
- हिंदू संगठनों की मांग: हिंदू संगठनों ने मांग की कि महादीपम को पहाड़ी की चोटी पर स्थित दीपपथून में प्रज्वलित किया जाना चाहिए।
- अदालत का आदेश (पहला): न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन ने इस मांग के पक्ष में आदेश दिया था कि महादीपम को पहाड़ी की चोटी पर स्थित दीपपथून में प्रज्वलित किया जाना चाहिए।
अनुराग ठाकुर का आरोप: कोर्ट के आदेश की अवहेलना
अनुराग ठाकुर ने सदन में कहा कि यह दुखद है कि लोगों को मंदिर तक पहुंचने के लिए ‘अदालत का रुख करना पड़ा‘।
- अदालत की अवमानना: हिंदू संगठनों ने विरोध तब शुरू किया जब उनका दावा था कि महादीपम पहाड़ की चोटी पर नहीं जलाया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता रामा रविकुमार ने अदालत की अवमानना का मामला दायर किया।
- अदालत का आदेश (दूसरा): न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता रामा रविकुमार को पहाड़ी की चोटी पर दीपक जलाने की अनुमति दी। आदेश दिया गया कि वह अपने साथ 10 लोगों को ले जा सकते हैं और सीआईएसएफ़ कर्मियों द्वारा उन्हें सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
- सरकार पर आरोप: अनुराग ठाकुर ने कहा कि अदालत के आदेश के बावजूद पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी, श्रद्धालुओं को रोका और लाठीचार्ज किया।
‘एंटी सनातन धर्म’ का प्रतीक
अनुराग ठाकुर ने डीएमके सरकार पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया कि “देश का एक राज्य एंटी सनातन धर्म का प्रतीक बन गया है” और “वहां के मंत्री लगातार हिन्दू विरोधी बयान दे रहे हैं।”
इस पूरे घटनाक्रम से तमिलनाडु में धार्मिक आस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप का मुद्दा गरमा गया है, जिसने अब राष्ट्रीय संसद में भी जगह बना ली है।










