“ग्रीन नहीं, क्लीन अरावली चाहती है सरकार”: अरावली विवाद पर पवन खेड़ा का वार, भूपेंद्र यादव के बयान को बताया भ्रामक

ईदुल अमीन
नई दिल्ली: उत्तर भारत की लाइफलाइन कही जाने वाली अरावली पहाड़ियों के अस्तित्व को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली की परिभाषा बदलने के बाद देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया है कि सरकार पर्यावरण के बजाय माफियाओं के हितों का संरक्षण कर रही है।

माफियाओं के साथ मिलीभगत का दावा: खेड़ा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार माइनिंग और रियल एस्टेट माफिया के हाथों में खेल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अरावली थार के रेगिस्तान और दिल्ली-हरियाणा के बीच एक प्राकृतिक दीवार का काम करती है। अगर इस दीवार को खत्म किया गया, तो पूरे उत्तर भारत का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा और रेगिस्तान का विस्तार दिल्ली की ओर होने लगेगा।
क्यों हो रहा है विवाद? दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की ओर से अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में बदलाव के बाद कई इलाकों में खनन और निर्माण कार्यों का रास्ता साफ होने की आशंका है। इसके विरोध में पर्यावरणविद और विपक्षी दल सड़कों पर हैं।
पर्यावरण मंत्री का पक्ष: दूसरी तरफ, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन विरोध प्रदर्शनों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अरावली की परिभाषा को लेकर जनता के बीच भ्रामक बातें फैला रहे हैं। सरकार पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।









