अखलाक हत्याकांड: योगी सरकार के मुकदमा वापसी के फैसले को पत्नी ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, कहा- “अन्याय हर जगह के न्याय के लिए खतरा है”

तारिक खान

प्रयागराज: साल 2015 में दादरी के बिसाहड़ा गांव में हुए मोहम्मद अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में एक बार फिर बड़ी कानूनी हलचल शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरोपियों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने के फैसले के खिलाफ अखलाक की पत्नी इकरामन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

क्या है पूरा मामला? 28 सितंबर 2015 को बिसाहड़ा गांव में 52 वर्षीय मोहम्मद अखलाक के घर में प्रतिबंधित मांस होने के संदेह में भीड़ ने घुसकर उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने इस मामले में हत्या सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर 18 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि 14 आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं।

सरकार की अर्जी और इकरामन की चुनौती: यूपी सरकार ने सीआरपीसी की धारा 321 के तहत ट्रायल कोर्ट में केस वापसी की अर्जी दाखिल की है। इसी कदम को इकरामन ने अधिवक्ता ओमर जामिन के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में अमेरिका के मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग जूनियर के प्रसिद्ध कथन का हवाला दिया गया है— कहीं भी अन्याय, हर जगह के न्याय के लिए खतरा है।” याचिका की मुख्य मांगें:

  • फैसला रद्द करने की मांग: इकरामन ने कोर्ट से सरकार के मुकदमा वापस लेने के फैसले को रद्द करने की गुहार लगाई है।
  • शक्तियों का दुरुपयोग: याचिका में कहा गया है कि कार्यपालिका की शक्तियों का प्रयोग संविधान के अनुरूप होना चाहिए, न कि राजनीतिक एजेंडे के लिए।
  • शीतकालीन अवकाश के बाद सुनवाई: इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ शीतकालीन अवकाश के बाद करेगी।

किसे बनाया गया है प्रतिवादी? याचिका में प्रदेश सरकार के विशेष सचिव, ग्रेटर नोएडा के डीएम, एडीएम, अभियोजन पक्ष के संयुक्त निदेशक सहित मामले के सभी जीवित आरोपियों (विशाल, संदीप, सौरव, गौरव आदि) को प्रतिवादी बनाया गया है।

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