अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत के क्रिसमस विवाद की गूँज; विदेशी अखबारों ने पूछा— क्या ‘डर के साये में’ है भारतीय ईसाई समुदाय?

निलोफर बानो
नई दिल्ली/लंदन: भारत के विभिन्न राज्यों में क्रिसमस सेलिब्रेशन के दौरान दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की गई कथित तोड़फोड़ और धमकियों की खबरें अब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के चर्च जाकर सद्भाव का संदेश दिया, वहीं वैश्विक मीडिया आउटलेट्स ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा को ‘बढ़ते धार्मिक राष्ट्रवाद’ के संकेत के रूप में पेश किया है।

- अरब टाइम्स कुवैत (Arab Times): कुवैत के इस प्रमुख अखबार ने दिल्ली और ओडिशा के वीडियो साझा करते हुए लिखा कि भारत में ईसाई अल्पसंख्यकों को संगठित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। रिपोर्ट में उस वीडियो का जिक्र है जहाँ कुछ लोग महिलाओं से सांता हैट उतरवा रहे हैं। अखबार ने इसे ‘दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद का उभार’ करार दिया है।
- द इंडिपेंडेंट, ब्रिटेन (The Independent): ब्रिटिश अखबार ने ‘कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया’ के हवाले से लिखा कि भारत में ईसाई समुदाय पर हमले बढ़ रहे हैं। अखबार ने चिंता जताई कि हिंदू राइट-विंग गुट खुलेआम पुलिस की मौजूदगी में जश्न में बाधा डाल रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा है।
- टीआरटी वर्ल्ड, तुर्की (TRT World): टीआरटी वर्ल्ड ने अपनी हेडलाइन में लिखा— “भारत में डर के साये में क्रिसमस सेलिब्रेशन।” रिपोर्ट में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और केरल की घटनाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है और आरोप लगाया गया कि हिंदूवादी संगठन धार्मिक स्वतंत्रता को चुनौती दे रहे हैं।
- द टेलीग्राफ, ब्रिटेन (The Telegraph): टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि किस तरह कई जगहों पर चर्च के भीतर चल रही प्रार्थना सभाओं को बलपूर्वक रोकने की कोशिश की गई।
मानवाधिकार संगठनों की मांग: विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने भारत सरकार से अपील की है कि वे ईसाई समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करें। विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम मोदी की चर्च यात्रा एक सकारात्मक कदम है, लेकिन जमीनी स्तर पर हो रही हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।
भारतीय मीडिया बनाम ग्लोबल मीडिया: जहाँ भारतीय मीडिया ने इन घटनाओं को छिटपुट विवादों के रूप में दिखाया, वहीं विदेशी प्रेस ने इसे भारत की ‘विविधता और धर्मनिरपेक्षता’ पर एक बड़े संकट के रूप में पेश किया है। जबलपुर में बीजेपी नेता द्वारा ईसाई लड़की को धमकाने वाले वीडियो की चर्चा विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है।
वैश्विक मीडिया की 3 मुख्य चिंताएं:
- धार्मिक स्वतंत्रता: क्या भारत में अब अल्पसंख्यक अपनी पसंद का त्योहार सुरक्षित तरीके से नहीं मना सकते?
- पुलिस की भूमिका: कई वीडियो में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद भीड़ का उग्र होना चिंता का विषय है।
- वैश्विक छवि: ऐसी घटनाओं से ‘विश्व गुरु’ बनने की राह पर अग्रसर भारत की सॉफ्ट पावर को नुकसान पहुँच रहा है।










