ईरान में आर्थिक आपातकाल: गिरती मुद्रा और महंगाई के खिलाफ ‘बाजार बंद’ के बाद झुकी सरकार; व्यापारियों के लिए भारी टैक्स राहत का ऐलान

आदिल अहमद
तेहरान: ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था और तेजी से गिरते ‘ईरानी रियाल’ ने देश में हाहाकार मचा दिया है। व्यापारियों और दुकानदारों के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद, ईरान सरकार ने व्यापारियों को राहत देने के लिए टैक्स नियमों में बड़े बदलावों की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब डॉलर की आसमान छूती कीमतों के कारण तेहरान समेत कई शहरों में बाजार पूरी तरह बंद हो गए थे।

- टैक्स फाइन माफी: इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस जारी न करने पर लगने वाले 100 फ़ीसदी जुर्माने को एक साल के लिए टाल दिया गया है।
- नोटिस में बदलाव: वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) के नोटिस में व्यापारियों के हक में बदलाव किए गए हैं।
- समय सीमा का विस्तार: कार्ड मशीन की रसीदों को इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस के रूप में स्वीकार करने की अवधि बढ़ा दी गई है।
बाजार बंद और ‘डॉलर की आपदा‘: तेहरान चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख हामिदरेज़ा रस्तेगार ने मौजूदा स्थिति को ‘आपदा’ करार देते हुए कहा कि विदेशी मुद्रा (डॉलर) की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने बिजनेस मॉडल को तबाह कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि सामान बेचने के बाद जब वे दोबारा माल खरीदने जाते हैं, तो डॉलर महंगा होने के कारण उन्हें अपनी जेब से पैसे भरने पड़ते हैं।
आम जनता तक पहुँचा आक्रोश: महंगाई के खिलाफ यह गुस्सा सिर्फ व्यापारियों तक सीमित नहीं है। तेहरान की सड़कों पर आम नागरिक भी इस आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को डॉलर के प्रभाव से मुक्त करने के लिए ठोस और वैज्ञानिक कदम नहीं उठाता, तब तक ऐसी राहतें केवल ‘मरहम’ का काम करेंगी।








