पतंजलि का लाल मिर्च पाउडर ‘असुरक्षित’….! लोकसभा में केंद्र सरकार ने किया पुष्टि, कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए; रिकॉल का आदेश जारी

तारिक खान
PNN24 न्यूज़: उत्तराखंड स्थित पतंजलि फूड्स की निर्माण इकाई में निर्मित लाल मिर्च पाउडर का एक नमूना ‘असुरक्षित‘ घोषित किया गया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी लोकसभा में दी। जांच में पाया गया कि इस उत्पाद में कीटनाशक अवशेषों का स्तर निर्धारित अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) से अधिक था।
कीटनाशक अवशेष MRL से अधिक
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
- असुरक्षित पाया गया: मंत्री ने बताया, “वर्ष 2024–25 में मसालों पर चलाए गए सैंपलिंग अभियान के दौरान उत्तराखंड स्थित पतंजलि फूड्स की निर्माण इकाई से लिया गया लाल मिर्च पाउडर का एक नमूना असुरक्षित पाया गया, क्योंकि उसमें पाए गए कीटनाशक अवशेषों का स्तर निर्धारित अधिकतम अवशेष सीमा (एमआरएल) से अधिक था।”
- रिकॉल आदेश: परीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित प्राधिकरण ने रिकॉल आदेश जारी किया। इसके बाद पतंजलि फूड्स ने प्रभावित उत्पाद को बाज़ार से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
- अमूल को क्लीन चिट: मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अमूल ब्रांड के किसी भी उत्पाद का कोई नमूना खाद्य सुरक्षा और मानक विनियमों में निर्धारित मानकों के विरुद्ध असुरक्षित नहीं पाया गया है।
FSSAI और नियमन की ज़िम्मेदारी
बाज़ार में उपभोक्ताओं को केवल गुणवत्ता-परीक्षित और सुरक्षित खाद्य उत्पाद ही उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की रणनीति पर मंत्री ने विस्तार से बताया।
- FSSAI का दायित्व: उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को विज्ञान-आधारित मानक निर्धारित करने और खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को विनियमित करने का दायित्व सौंपा गया है।
- साझा जिम्मेदारी: खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन और प्रवर्तन की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझा है।
- कार्रवाई: मंत्री ने बताया कि मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर दोषी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBO) के खिलाफ दंडात्मक कदम सहित नियामकीय कार्रवाई की जाती है।
गुणवत्ता पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
पतंजलि फूड्स पर गुणवत्ता मानकों को लेकर यह सवाल कोई नया नहीं है।
- पूर्व की घटनाएँ:
- इसी महीने की शुरुआत में पतंजलि निर्मित घी का सैंपल क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट में फेल हुआ था और कंपनी पर जुर्माना लगाया गया था।
- मई 2024 में उत्तराखंड की एक अदालत ने सोन पापड़ी के गुणवत्ता परीक्षण में फेल होने के बाद पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के एक सहायक प्रबंधक सहित तीन लोगों को छह महीने जेल की सज़ा सुनाई थी।
- इससे पहले, उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक रूल्स के उल्लंघन के लिए पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और दिव्य फार्मेसी के 14 उत्पादों के विनिर्माण लाइसेंस को निलंबित कर दिया था।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष MDH और एवरेस्ट जैसी अन्य मसाला कंपनियों के उत्पाद भी हांगकांग और सिंगापुर में कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों के कथित उच्च स्तर के कारण जाँच के दायरे में आए थे।










