पुतिन का यूरोप को सीधा संदेश: “हम जंग नहीं चाहते, पर लड़ना चाहोगे तो तैयार हैं……!”

आफताब फारुकी
डेस्क: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप को लेकर एक बेहद तल्ख और दो-टूक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रूस, यूरोप के साथ किसी भी तरह का संघर्ष नहीं चाहता, लेकिन अगर यूरोपीय देश लड़ना चाहते हैं, तो रूस पूरी तरह से तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ से मिलने की तैयारी कर रहे हैं।
इन्वेस्टमेंट फ़ोरम के बाद दिया बयान
रूसी राष्ट्रपति ने पहले एक इन्वेस्टमेंट फ़ोरम में भाषण दिया। हालांकि, उन्होंने मंच से कोई सवाल नहीं लिया, लेकिन फोरम खत्म होने के बाद ट्रेड सेंटर की लॉबी में इकट्ठा हुए पत्रकारों से उन्होंने संक्षिप्त बातचीत की। पत्रकारों ने उनसे यूक्रेन के साथ शांति वार्ता में यूरोप की भूमिका के बारे में पूछा। इस सवाल पर पुतिन का लहजा कड़ा हो गया।
“यूरोप का कोई शांतिपूर्ण एजेंडा नहीं”
पुतिन ने यूरोपीय देशों पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उनका “कोई शांतिपूर्ण एजेंडा नहीं है।” उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को सुलझाने के लिए अमेरिका द्वारा किए जा रहे प्रयासों में लगातार बाधा डाल रहे हैं।
राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी साफ़ किया कि युद्ध समाप्त करने के लिए यूरोप की जो मांगें हैं, वे रूस को “मंज़ूर नहीं” हैं।
खुली चुनौती: “लड़ना चाहोगे, तो हम तैयार हैं”
अपने बयान के अंत में, पुतिन ने यूरोप को एक तरह से खुली चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा:
“हम यूरोप से नहीं लड़ने जा रहे हैं, लेकिन अगर यूरोप हमसे लड़ना चाहता है, तो हम अभी तैयार हैं।”
यह बयान यूरोपीय देशों पर शांति प्रक्रिया में बाधा डालने और संघर्ष को बढ़ाने का सीधा आरोप है। यह दिखाता है कि रूस, यूक्रेन पर अपनी सैन्य कार्रवाई के बाद भी, यूरोप के सैन्यीकरण और पश्चिमी देशों के रुख से चिंतित है। पुतिन की नज़र अब अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ के साथ होने वाली बातचीत पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि यूक्रेन संकट को सुलझाने में अमेरिका और रूस किस हद तक सहयोग कर पाते हैं।











