बड़ा यू-टर्न….! ‘संचार साथी’ ऐप को प्री-इंस्टॉल करने का आदेश वापस, सरकार बोली- ‘नागरिकों का भरोसा बढ़ा’

आदिल अहमद

PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन यूजर्स को एक बड़ी राहत दी है। संचार मंत्रालय ने सभी नए स्मार्टफ़ोन में ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) ऐप को ज़रूरी तौर पर प्री-इंस्टॉल करने के अपने विवादास्पद फ़ैसले को वापस ले लिया है। इस संबंध में संचार मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर जानकारी दी है। यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब इस ऐप की अनिवार्यता को लेकर गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे थे।

‘साइबर सुरक्षा’ के लिए लिया था फैसला

संचार मंत्रालय ने अपने इस फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह ऐप पूरी तरह से सुरक्षित है और इसका उद्देश्य केवल नागरिकों को साइबर खतरों से बचाना था।

  • मकसद: प्रेस रिलीज़ में लिखा गया, “सरकार ने सभी नागरिकों को साइबर सुरक्षा देने के इरादे से सभी नए स्मार्टफ़ोन में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करना ज़रूरी किया था। यह ऐप सुरक्षित है और इसका मक़सद सिर्फ़ नागरिकों को साइबर दुनिया की बुराई से बचाना है।”
  • मंत्री का आश्वासन: इससे पहले, संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में स्पष्ट किया था कि संचार साथी ऐप से न तो जासूसी (स्नूपिंग) संभव है और न होगी।

तेजी से बढ़ रहे हैं यूज़र्स, इसलिए वापस लिया फैसला

मंत्रालय ने कहा कि प्री-इंस्टॉलेशन को अनिवार्य करने का निर्णय इसलिए लिया गया था ताकि कम जागरूक नागरिकों को भी यह साइबर सुरक्षा कवच आसानी से मिल सके। हालाँकि, नागरिकों का भरोसा बढ़ने के बाद सरकार ने अपना फैसला बदल दिया।

  • आंकड़े: मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 4 करोड़ यूज़र्स ने यह ऐप डाउनलोड किया है और वे हर दिन 2000 फ्रॉड की घटनाओं की जानकारी देने में मदद कर रहे हैं।
  • बढ़ता भरोसा: मंत्रालय ने बताया कि “बीते एक दिन में, 6 लाख नागरिकों ने ऐप डाउनलोड करने के लिए रजिस्टर किया है, जो इसके इस्तेमाल में 10 गुना बढ़ोतरी है। यह इस ऐप पर नागरिकों के भरोसे को दिखाता है।”
  • यू-टर्न की वजह: “संचार साथी की बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए, सरकार ने मोबाइल बनाने वालों के लिए इसके प्री-इंस्टॉलेशन को ज़रूरी नहीं करने फ़ैसला किया है।”

केंद्र सरकार के इस यू-टर्न को तकनीकी और नागरिक स्वतंत्रता समूहों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने लगातार निजता के अधिकार को लेकर चिंता जताई थी।

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