अंकिता भंडारी हत्याकांड: ‘इंसाफ की धीमी चाल’— 3 साल बाद भी क्यों नहीं सुलझा ‘VIP’ का रहस्य? जानिए कानूनी पेच

शफी उस्मानी

डेस्क: अंकिता भंडारी हत्याकांड को तीन साल होने को हैं, लेकिन उत्तराखंड की इस बेटी के लिए न्याय का इंतज़ार खत्म नहीं हो रहा है। मामला वर्तमान में कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में विचाराधीन है। आइए समझते हैं कि इस केस में अब तक क्या हुआ और न्याय मिलने में देरी क्यों हो रही है।

1. ट्रायल की वर्तमान स्थिति (Current Trial Status)

इस मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर जेल में हैं।

  • गवाही की प्रक्रिया: अब तक 30 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इसमें अंकिता के पिता, दोस्त पुष्पदीप और रिसॉर्ट के पूर्व कर्मचारी शामिल हैं।
  • बयानों में बदलाव: बीच में ऐसी खबरें आई थीं कि कुछ गवाह अपने बयानों से पलट रहे हैं (Hostile Witness), जिससे अभियोजन पक्ष (Prosecution) की चुनौतियां बढ़ गई हैं।

2. CBI जांच की मांग और कानूनी अड़चन

पीड़ित परिवार और विपक्षी दल शुरू से ही SIT (विशेष जांच दल) की जांच पर असंतोष जताते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

  • हाईकोर्ट का रुख: दिसंबर 2022 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ‘एसआईटी सही दिशा में जांच कर रही है’।
  • सुप्रीम कोर्ट: परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन वहां से भी तुरंत सीबीआई जांच का आदेश नहीं मिल सका। कानूनन, यदि राज्य की एजेंसी (SIT) चार्जशीट दाखिल कर चुकी हो, तो जांच बदलना एक जटिल प्रक्रिया बन जाती है।

3. वो ‘VIP’ कौन? सबसे बड़ा सवाल

अंकिता की दोस्त के साथ हुई चैट में एक ‘VIP गेस्ट’ के लिए “स्पेशल सर्विस” देने का जिक्र था।

  • SIT का दावा: एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में कहा कि ‘वीआईपी’ कोई विशेष व्यक्ति नहीं बल्कि उस कमरे का नाम (Presidential Suite) हो सकता है या कोई अज्ञात व्यक्ति।
  • जनता का संदेह: लोगों का मानना है कि एसआईटी ने उस रसूखदार व्यक्ति का नाम उजागर नहीं किया जो रिसॉर्ट आने वाला था। इसी नाम का खुलासा न होना केस की सबसे बड़ी कमजोरी मानी जा रही है।

4. सबूतों के साथ छेड़छाड़ के आरोप

घटना के तुरंत बाद वनंतरा रिसॉर्ट के उस हिस्से पर बुलडोजर चलाया गया था जहाँ अंकिता रहती थी।

  • विवाद: कानूनी जानकारों का मानना है कि बुलडोजर कार्रवाई से कई महत्वपूर्ण फोरेंसिक सबूत नष्ट हो गए होंगे। पुलिस ने इसे जन आक्रोश का नतीजा बताया, लेकिन इसे “साक्ष्यों को नष्ट करने की साजिश” के तौर पर भी देखा जाता है।

न्याय में देरी क्यों?

न्याय मिलने में देरी की मुख्य वजह हाई-प्रोफाइल आरोपियों का रसूख, महत्वपूर्ण साक्ष्यों का अभाव और जांच एजेंसी पर राजनीतिक दबाव के आरोप हैं। वर्तमान में ट्रायल कोर्ट में केस अंतिम चरणों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन ‘VIP’ का नाम सामने न आना पीड़ित परिवार के घावों पर नमक की तरह है।

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